कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 12: जीवन के पैटर्न – विविधता एवं वर्गीकरण — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर
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qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026
संक्षेप में उत्तर
हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 12 (“जीवन के पैटर्न – विविधता एवं वर्गीकरण”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।
कक्षा 9 विज्ञान का अध्याय 12 'जीवन के पैटर्न – विविधता और वर्गीकरण' जीवों की अद्भुत विविधता को समझने और उन्हें व्यवस्थित करने की वैज्ञानिक पद्धति पर केंद्रित है। यह अध्याय हमें बताता है कि करोड़ों प्रकार के जीवों का अध्ययन तभी संभव है जब उन्हें समानताओं के आधार पर वर्गों में बाँटा जाए। इसमें जैव विविधता की अवधारणा, अरस्तू के प्रारंभिक वर्गीकरण से लेकर व्हिटेकर के पाँच जगत तंत्र तक का सफर, तथा पादप और प्राणी समूहों के प्रमुख लक्षण शामिल हैं। पादपों में संवहन ऊतक व बीज की उपस्थिति के आधार पर ब्रायोफाइट, टेरिडोफाइट, अनावृतबीजी और आवृतबीजी का विभाजन समझाया गया है। प्राणी जगत में अकशेरुकी से लेकर कशेरुकी तक के संघों की बुनियादी विशेषताएँ दी गई हैं। अनोखी बात यह है कि अध्याय में अरुणाचल प्रदेश के पाक्के टाइगर रिज़र्व में मिलने वाली चार हॉर्नबिल प्रजातियों का उदाहरण देकर यह स्पष्ट किया गया है कि वर्गीकरण जैव विविधता संरक्षण, आवास प्रबंधन और पारिस्थितिक अध्ययन में कैसे सहायक होता है। परीक्षा की दृष्टि से, इस अध्याय में पूछे जाने वाले प्रश्न प्रायः अवधारणात्मक होते हैं – जैसे जैव विविधता हॉटस्पॉट की पहचान, दिए गए लक्षणों से जीव का समूह बताना (उदाहरण: एक बीज युक्त परंतु पुष्पहीन पादप), तथा वर्गीकरण के लाभ को किसी वास्तविक उदाहरण से जोड़कर समझाना। यहाँ दिए गए प्रश्न-उत्तर ऐसे ही पैटर्न को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं, जिससे आप परीक्षा में आत्मविश्वास के साथ उत्तर लिख सकें।
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विज्ञान — जीवन के पैटर्न – विविधता एवं वर्गीकरण
खंड क
- 1.1
जैव विविधता से तात्पर्य है:
(a) केवल पादपों की प्रजातियाँ(b) केवल जंतुओं की प्रजातियाँ(c) पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीव और उनके पारिस्थितिक तंत्र(d) केवल सूक्ष्मजीव - 2.1
कवक और जंतु दोनों में समान रूप से पाई जाने वाली विशेषता कौन-सी है?
(a) प्रकाश-संश्लेषण(b) स्वपोषी पोषण(c) काइटिन युक्त कोशिका भित्ति(d) परपोषी पोषण - 3.1
एक नए खोजे गए एककोशिकीय जीव में झिल्ली-युक्त केंद्रक पाया गया, किंतु कोशिका भित्ति नहीं है। यह प्रकाश-संश्लेषण नहीं करता और गतिशील है। इसे किस जगत में रखा जाना चाहिए?
(a) मोनेरा(b) प्रोटिस्टा(c) कवक(d) जंतु
पूरे पेपर में 41 और प्रश्न
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CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:
| प्रश्न प्रकार | प्रति अंक | हमारे बैंक में |
|---|---|---|
| बहुविकल्पीय (MCQ) | 1 अंक | 13 |
| अभिकथन–कारण | 1 अंक | 6 |
| लघु उत्तरीय | 2 अंक | 8 |
| लघु उत्तरीय | 3 अंक | 6 |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 अंक | 5 |
| केस स्टडी | 4 अंक | 6 |
इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।
महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्न (उत्तर सहित)
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- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q1. जैव विविधता से तात्पर्य है:
1 अंक(A) केवल पादपों की प्रजातियाँ(B) केवल जंतुओं की प्रजातियाँ(C) पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीव और उनके पारिस्थितिक तंत्र(D) केवल सूक्ष्मजीव▸ उत्तर▾ उत्तर
पृथ्वी पर पाए जाने वाले सभी जीव और उनके पारिस्थितिक तंत्र
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q2. कवक और जंतु दोनों में समान रूप से पाई जाने वाली विशेषता कौन-सी है?
1 अंक(A) प्रकाश-संश्लेषण(B) स्वपोषी पोषण(C) काइटिन युक्त कोशिका भित्ति(D) परपोषी पोषण▸ उत्तर▾ उत्तर
परपोषी पोषण
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q3. एक नए खोजे गए एककोशिकीय जीव में झिल्ली-युक्त केंद्रक पाया गया, किंतु कोशिका भित्ति नहीं है। यह प्रकाश-संश्लेषण नहीं करता और गतिशील है। इसे किस जगत में रखा जाना चाहिए?
1 अंक(A) मोनेरा(B) प्रोटिस्टा(C) कवक(D) जंतु▸ उत्तर▾ उत्तर
प्रोटिस्टा
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q4. एक पादप में पुष्प नहीं पाए जाते, लेकिन उसमें संवहन ऊतक और बीज विद्यमान हैं। यह पादप संभवतः किस समूह से संबंधित होगा?
1 अंक(A) ब्रायोफाइटा(B) टेरिडोफाइटा(C) जिम्नोस्पर्म(D) एंजियोस्पर्म▸ उत्तर▾ उत्तर
जिम्नोस्पर्म
- अभिकथन–कारण
Q5. अभिकथन (A): अमीबा और पैरामीशियम को प्रोटिस्टा जगत में रखा जाता है। कारण (R): प्रोटिस्टा जगत एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीवों का समूह है।
1 अंक(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।▸ उत्तर▾ उत्तर
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
- लघु उत्तरीय
Q6. जैव विविधता हॉटस्पॉट का संरक्षण क्यों आवश्यक है? इसमें वर्गीकरण किस प्रकार सहायक हो सकता है?
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
हॉटस्पॉट में बहुत-सी स्थानिक प्रजातियाँ होती हैं और आवास क्षति का खतरा रहता है; वर्गीकरण से हमें यह पहचानने में मदद मिलती है कि कौन-सी प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे में हैं, जिससे उनके संरक्षण को प्राथमिकता दी जा सके।
- लघु उत्तरीय
Q7. अरस्तु ने जीवों को स्थल, जल और वायु के आधार पर वर्गीकृत किया। इस वर्गीकरण की एक सीमा बताइए।
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
यह वर्गीकरण केवल आवास और बाह्य लक्षणों पर आधारित था, जिससे असमान आंतरिक संरचना वाले जीव (जैसे मछली और व्हेल) एक ही समूह में आ जाते हैं।
- लघु उत्तरीय
Q8. नीलगिरि तहर और शेर-पूँछ वाले मकाक जैसे स्थानिक प्रजातियों के अस्तित्व पर यदि पश्चिमी घाट में वनों की कटाई तेजी से बढ़े तो क्या प्रभाव पड़ सकता है? इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए वर्गीकरण का ज्ञान किस प्रकार सहायक हो सकता है?
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
वनों की कटाई से पश्चिमी घाट में नीलगिरि तहर और शेर-पूँछ वाले मकाक के प्राकृतिक आवास नष्ट होंगे, जिससे उनके भोजन स्रोत, प्रजनन स्थल और आश्रय समाप्त हो जाएँगे। इससे इनकी संख्या तेजी से घटेगी और ये विलुप्त होने के कगार पर पहुँच सकती हैं। वर्गीकरण का ज्ञान इन प्रजातियों की पहचान, उनके पारिस्थितिकीय संबंधों और विकासीय इतिहास को समझने में मदद करता है। इस आधार पर वैज्ञानिक इनके लिए विशेष संरक्षण योजनाएँ बना सकते हैं, जैसे आवास पुनर्स्थापन, संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना और कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम। जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में वर्गीकृत होने के कारण यह क्षेत्र संरक्षण के लिए प्राथमिकता प्राप्त करता है।
- लघु उत्तरीय
Q9. जैव विविधता किसे कहते हैं? भारत को जैव विविधता हॉटस्पॉट क्यों माना जाता है? दो कारण लिखिए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
जैव विविधता पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवों की विभिन्न प्रजातियों, उनके आनुवंशिक विभिन्नताओं और पारितंत्रों की विविधता को कहते हैं। भारत को जैव विविधता हॉटस्पॉट माने जाने के दो कारण: 1. यहाँ बड़ी संख्या में स्थानिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। 2. इन क्षेत्रों में प्राकृतिक आवासों का अत्यधिक क्षरण हुआ है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q10. स्थानिक प्रजातियाँ और जैव विविधता हॉटस्पॉट क्या होते हैं? भारत के किन्हीं तीन हॉटस्पॉट क्षेत्रों का नाम लिखकर यह स्पष्ट कीजिए कि इन क्षेत्रों का संरक्षण क्यों आवश्यक है।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
स्थानिक प्रजातियाँ वे हैं जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में ही पाई जाती हैं और विश्व में अन्यत्र नहीं। जैसे नीलगिरि तहर, सिंह-पूंछ मकाक, नेपेंथीस खासियाना और नीलकुरिंजी। जैव विविधता हॉटस्पॉट ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ बड़ी संख्या में स्थानिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं और जिनके प्राकृतिक आवास का काफी हिस्सा नष्ट हो चुका है। भारत के तीन प्रमुख हॉटस्पॉट हैं: (1) पश्चिमी घाट, (2) इंडो-बर्मा (पूर्वोत्तर भारत सहित), (3) हिमालय। इन क्षेत्रों का संरक्षण आवश्यक है क्योंकि ये प्रजातियों की समृद्ध विविधता और स्थानिकता के केंद्र हैं, ये खाद्य जालों और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं, और मानव समुदायों को आजीविका व पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करते हैं। इनके बिना कई प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं और पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ सकता है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q11. पाक्के टाइगर रिजर्व केस स्टडी के आलोक में, हॉर्नबिल की चार प्रजातियों के आवास और आहार संबंधी आँकड़ों का विश्लेषण कीजिए। वर्गीकरण किस प्रकार पारिस्थितिक अनुसंधान और इन हॉर्नबिल प्रजातियों के संरक्षण में सहायक हो सकता है? एक संरक्षण योजना की रूपरेखा प्रस्तुत कीजिए।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
पाक्के टाइगर रिजर्व में पाई जाने वाली चार हॉर्नबिल प्रजातियाँ—रुफस-नेक्ड, ओरिएंटल पाइड, ग्रेट और रीथ्ड हॉर्नबिल—विशिष्ट आवास और आहार पर निर्भर करती हैं। ये बड़े, पुराने पेड़ों की गुहाओं में घोंसला बनाती हैं और विशिष्ट फलों पर निर्भर हैं। वर्गीकरण वैज्ञानिकों को प्रत्येक प्रजाति की पहचान करने, उनके बीच संबंध स्थापित करने और उनकी पारिस्थितिक भूमिका समझने में मदद करता है। इस जानकारी से यह पता चलता है कि बड़े, पुराने पेड़ और फलदार वृक्ष प्रत्येक प्रजाति के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। संरक्षण योजना: (1) घोंसला बनाने वाले वृक्षों और फलदार वृक्षों का मानचित्रण कर उनका संरक्षण; (2) वन क्षेत्र में इन वृक्षों की कटाई पर प्रतिबंध; (3) प्रजाति-विशिष्ट आहार फलों की उपलब्धता बढ़ाने हेतु पौधरोपण; (4) घोंसला क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप घटाना; (5) प्रजातियों की नियमित निगरानी और स्थानीय समुदायों को संरक्षण में शामिल करना।
- केस स्टडी
Q12. पश्चिमी घाट में एक वन पारितंत्र है जहाँ कई स्थानिक पादप और प्राणी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यहाँ एक विशेष प्रकार का पेड़ है जिस पर एक प्रकार की तितली अपने अंडे देती है और उसी पेड़ के फलों पर एक पक्षी प्रजाति निर्भर है। हाल ही में, अवैध कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण इस पेड़ की संख्या घट रही है। वैज्ञानिक इन प्रजातियों के संरक्षण के लिए योजना बना रहे हैं।
4 अंक- (i) इस पारितंत्र में जैव विविधता के तीन घटकों की पहचान कीजिए और बताइए कि वर्गीकरण कैसे उन्हें अध्ययन में मदद करता है।2 अंक
- (ii) उपरोक्त स्थिति को देखते हुए, संरक्षण के लिए वर्गीकरण के किन्हीं दो अनुप्रयोगों का सुझाव दीजिए।2 अंक
▸ उत्तर▾ उत्तर
पारितंत्र में स्थानिक पादप, तितली और पक्षी प्रजाति शामिल हैं। वर्गीकरण से पहचान और संबंध समझ में आते हैं। संरक्षण अनुप्रयोग हैं: विलुप्तप्राय प्रजातियों की पहचान और अंतर्निर्भरता आधारित संरक्षण।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परीक्षा में जैव विविधता हॉटस्पॉट से क्या अपेक्षित है?
भारत के चार हॉटस्पॉट (पश्चिमी घाट, हिमालय, इंडो-बर्मा और सुंडालैंड) और उनकी विशेषताएँ – उच्च स्थानिक प्रजातियाँ एवं आवास क्षति – याद करनी चाहिए।
यदि कोई पादप बिना पुष्प का है, उसमें संवहन ऊतक और बीज हैं, तो यह किस समूह में आएगा?
यह अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म) समूह का पादप है; जैसे चीड़ या साइकस।
एक सूक्ष्मजीव हरा, प्रकाश-संश्लेषक और सुकेंद्रकीय है, तो उसे किस जगत में रखेंगे?
ऐसे लक्षणों वाला जीव प्रायः प्रोटिस्टा जगत (शैवाल) में आता है, यदि वह एककोशिकीय या सरल बहुकोशिकीय है; किंतु यदि उच्च पादपों जैसा ऊतक विभेदन दिखे तो पादप जगत में रखा जा सकता है।
पाक्के टाइगर रिज़र्व के हॉर्नबिल उदाहरण का परीक्षा में क्या महत्व है?
इस उदाहरण से वर्गीकरण के लाभ को समझाया जा सकता है: विभिन्न प्रजातियों की पहचान कर संरक्षण रणनीति बनाना, आवास की स्थिति का आकलन करना और पारिस्थितिक अध्ययन को सरल बनाना।
अन्य अध्याय
- अध्याय 1: अन्वेषण – माध्यमिक विज्ञान की दुनिया में प्रवेश
- अध्याय 2: कोशिका – जीवन की आधारभूत इकाई
- अध्याय 3: ऊतकों की कार्यप्रणाली
- अध्याय 4: हमारे चारों ओर गति का वर्णन
- अध्याय 5: मिश्रण और उनका पृथक्करण
- अध्याय 6: बल गति को कैसे प्रभावित करते हैं
- अध्याय 7: कार्य, ऊर्जा और सरल मशीनें
- अध्याय 8: परमाणु के भीतर की यात्रा
- अध्याय 9: पदार्थ का परमाणु आधार
- अध्याय 10: ध्वनि तरंगें – विशेषताएँ और अनुप्रयोग
- अध्याय 11: प्रजनन – जीवन की निरंतरता
- अध्याय 12: जीवन के पैटर्न – विविधता एवं वर्गीकरण
- अध्याय 13: पृथ्वी एक तंत्र के रूप में – ऊर्जा, पदार्थ और जीवन