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कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 8: परमाणु के भीतर की यात्रा — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर

CBSE· 44+ मौलिक प्रश्न तैयारView in English

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qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026

संक्षेप में उत्तर

हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 8 (“परमाणु के भीतर की यात्रा”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।

कक्षा 9 विज्ञान का अध्याय 8 'परमाणु के भीतर की यात्रा' विद्यार्थियों को परमाणु की आंतरिक संरचना की ऐतिहासिक खोज की रोचक यात्रा पर ले जाता है। इस अध्याय में डाल्टन के अविभाज्य परमाणु से लेकर थॉमसन और रदरफोर्ड के मॉडलों तक का विकास शामिल है। मुख्य विषयों में कैथोड किरणों द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज, थॉमसन का तरबूज मॉडल (धनावेशित गोले में एम्बेडेड इलेक्ट्रॉन), रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग और नाभिक की खोज, तथा ग्रहीय मॉडल का वर्णन है। साथ ही, इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के गुण, परमाणु और नाभिक के आकार में विशाल अनुपात (10^-10 मी बनाम 10^-15 मी) पर ध्यान दिया गया है। महत्वपूर्ण योग्यताएँ: दोनों मॉडलों की तुलना करना, यह समझना कि रदरफोर्ड का मॉडल प्रकीर्णन परिणामों को क्यों समझा सका, लेकिन परमाणु की स्थिरता की व्याख्या नहीं कर पाया (त्वरित इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरित कर नाभिक में गिर जाने चाहिए थे)। सीबीएसई परीक्षाओं में इस अध्याय से प्रत्ययात्मक, तुलनात्मक, कारण-आधारित, संख्यात्मक और काल्पनिक स्थितियों पर तर्कपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं।

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विज्ञानपरमाणु के भीतर की यात्रा

कक्षा 9समय: 3 घंटेअधिकतम अंक: 80

खंड क

  1. 1.

    जे.जे. थॉमसन ने यह निष्कर्ष कैसे निकाला कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं में उपस्थित होते हैं?

    (a) सभी गैसों में कैथोड किरणों का रंग समान था।(b) कैथोड किरणें सदा चुंबकीय क्षेत्र में विक्षेपित होती थीं।(c) कैथोड किरणों के गुण कैथोड के पदार्थ या नलिका में भरी गैस पर निर्भर नहीं करते थे।(d) कैथोड किरणों से एक्स-रे उत्पन्न होती थी।
    1
  2. 2.

    रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग का कौन-सा प्रेक्षण थॉमसन के प्लम-पुडिंग मॉडल को पूरी तरह अस्वीकार करता है?

    (a) अधिकांश अल्फा कण बिना विक्षेपण के निकल गए।(b) कुछ अल्फा कण छोटे कोणों से विक्षेपित हुए।(c) बहुत कम अल्फा कण 90° से अधिक कोण पर विक्षेपित हुए, यहाँ तक कि वापस लौट आए।(d) अल्फा कण पन्नी से टकराकर चमक उत्पन्न करते हैं।
    1
  3. 3.

    रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी से बिना विक्षेपित हुए पार क्यों निकल गए?

    (a) अल्फा कण बहुत भारी थे(b) स्वर्ण-पत्र बहुत पतला था(c) परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है(d) धन आवेश एकसमान वितरित था
    1

पूरे पेपर में 41 और प्रश्न

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अंक-विभाजन व ब्लूप्रिंट

CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:

प्रश्न प्रकारप्रति अंकहमारे बैंक में
बहुविकल्पीय (MCQ)1 अंक13
अभिकथन–कारण1 अंक6
लघु उत्तरीय2 अंक8
लघु उत्तरीय3 अंक6
दीर्घ उत्तरीय5 अंक5
केस स्टडी4 अंक6

इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।

महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्न (उत्तर सहित)

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  1. Q1. जे.जे. थॉमसन ने यह निष्कर्ष कैसे निकाला कि इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं में उपस्थित होते हैं?

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) सभी गैसों में कैथोड किरणों का रंग समान था।(B) कैथोड किरणें सदा चुंबकीय क्षेत्र में विक्षेपित होती थीं।(C) कैथोड किरणों के गुण कैथोड के पदार्थ या नलिका में भरी गैस पर निर्भर नहीं करते थे।(D) कैथोड किरणों से एक्स-रे उत्पन्न होती थी।
    उत्तर

    कैथोड किरणों के गुण कैथोड के पदार्थ या नलिका में भरी गैस पर निर्भर नहीं करते थे।

  2. Q2. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग का कौन-सा प्रेक्षण थॉमसन के प्लम-पुडिंग मॉडल को पूरी तरह अस्वीकार करता है?

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) अधिकांश अल्फा कण बिना विक्षेपण के निकल गए।(B) कुछ अल्फा कण छोटे कोणों से विक्षेपित हुए।(C) बहुत कम अल्फा कण 90° से अधिक कोण पर विक्षेपित हुए, यहाँ तक कि वापस लौट आए।(D) अल्फा कण पन्नी से टकराकर चमक उत्पन्न करते हैं।
    उत्तर

    बहुत कम अल्फा कण 90° से अधिक कोण पर विक्षेपित हुए, यहाँ तक कि वापस लौट आए।

  3. Q3. रदरफोर्ड के अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग में अधिकांश अल्फा कण सोने की पन्नी से बिना विक्षेपित हुए पार क्यों निकल गए?

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) अल्फा कण बहुत भारी थे(B) स्वर्ण-पत्र बहुत पतला था(C) परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है(D) धन आवेश एकसमान वितरित था
    उत्तर

    परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त स्थान है

  4. Q4. यदि रदरफोर्ड के प्रयोग में स्वर्ण-पत्र की मोटाई बढ़ा दी जाए तो प्रेक्षणों में क्या परिवर्तन अपेक्षित है?

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) सभी अल्फा कण बिना विक्षेपित हुए पार निकल जाएंगे।(B) अधिकांश अल्फा कण अवशोषित हो जाएंगे।(C) कुछ और अल्फा कण बड़े कोणों पर विक्षेपित होंगे और कुछ अवशोषित भी हो सकते हैं।(D) प्रेक्षणों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
    उत्तर

    कुछ और अल्फा कण बड़े कोणों पर विक्षेपित होंगे और कुछ अवशोषित भी हो सकते हैं।

  5. Q5. अभिकथन (A): रदरफोर्ड के प्रयोग में, कुछ अल्फा कण सोने की पन्नी से लगभग 180° पर वापस लौट आए। कारण (R): अल्फा कण का द्रव्यमान सोने के नाभिक की तुलना में बहुत अधिक होता है।

    1 अंक
    अभिकथन–कारण
    (A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।
    उत्तर

    अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।

  6. Q6. यदि थॉमसन मॉडल में धनावेशित गोले का कुल आवेश इलेक्ट्रॉनों के कुल आवेश के बराबर न हो, तो क्या होगा? एक परिदृश्य लेकर समझाइए जहाँ धनावेश कम हो।

    2 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    यदि धनावेश इलेक्ट्रॉनों के ऋणावेश से कम है, तो परमाणु समग्रतः ऋणावेशित हो जाएगा। ऐसा परमाणु उदासीन नहीं रहेगा और वह आयन बन जाएगा।

  7. Q7. थॉमसन और रदरफोर्ड के परमाणु मॉडलों की तुलना करते हुए सिद्ध कीजिए कि रदरफोर्ड का मॉडल खोल पन्नी प्रयोग को स्पष्ट करने में अधिक सफल रहा, फिर भी इसकी अपनी सीमाएँ थीं।

    2 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    थॉमसन मॉडल में धनावेश सम्पूर्ण गोले में समान रूप से फैला था, जो अल्फा कणों के बड़े कोणीय विक्षेपण की व्याख्या नहीं कर सका। रदरफोर्ड मॉडल में सघन नाभिक ने इस विक्षेपण को समझाया। किन्तु रदरफोर्ड मॉडल गतिज इलेक्ट्रॉनों से ऊर्जा विकिरण और परमाणु की स्थिरता की व्याख्या नहीं कर सका।

  8. Q8. जे. जे. थॉमसन ने परमाणु का 'प्लम पुडिंग' मॉडल प्रस्तुत किया। इस मॉडल का वर्णन कीजिए तथा स्पष्ट कीजिए कि इसकी तुलना तरबूज से क्यों की जाती है।

    3 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    थॉमसन के मॉडल के अनुसार, परमाणु एक समान धनावेशित गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन उसी प्रकार धँसे रहते हैं जैसे तरबूज के लाल गूदे में बीज। अतः सकारात्मक आवेश गूदे के समान तथा इलेक्ट्रॉन बीजों के समान हैं। यह मॉडल परमाणु की उदासीनता को समझाता है।

  9. Q9. मान लीजिए किसी वैज्ञानिक को एक नया कण मिलता है जिसका आवेश +2e (जहाँ e प्रोटॉन का आवेश है) तथा द्रव्यमान प्रोटॉन से बहुत अधिक है। यदि इस कण का उपयोग अल्फा कणों के स्थान पर स्वर्ण पत्र प्रयोग में किया जाए, तो परिणामों पर क्या प्रभाव पड़ेगा? तर्क सहित पूर्वानुमान लगाइए।

    3 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    यह नया कण अधिक भारी और अधिक आवेशित है। नाभिक से कूलॉम प्रतिकर्षण बल अधिक होगा, तथा भारी होने के कारण इसका संवेग अधिक होने पर भी प्रकीर्णन अधिक प्रभावशाली होगा। संभवतः बहुत कम कण सीधे निकलेंगे; अधिकांश बड़े कोणों पर विक्षेपित होंगे और पश्च-प्रकीर्णन की घटनाएँ भी बढ़ जाएँगी।

  10. Q10. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्तीय पथों में घूमते हैं। भौतिकी के सिद्धांतों का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि यह मॉडल परमाणु की स्थिरता की व्याख्या करने में विफल क्यों रहा? बाद में इस समस्या का समाधान कैसे किया गया?

    5 अंक
    दीर्घ उत्तरीय
    उत्तर

    रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्तीय कक्षाओं में घूमते हैं। चिरसम्मत विद्युत-चुम्बकत्व के अनुसार, कोई भी त्वरित आवेशित कण विद्युत-चुम्बकीय विकिरण उत्सर्जित करता है। वृत्तीय गति में त्वरण (अभिकेंद्रीय त्वरण) होता है, अतः इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा खोएगा और उसकी कक्षा छोटी होती जाएगी। अंततः यह सर्पिल पथ पर चलता हुआ नाभिक में गिर जाएगा, जिससे परमाणु अस्थायी हो जाएगा। परन्तु वास्तविकता में परमाणु स्थायी हैं। बाद में, नील्स बोर ने क्वांटम सिद्धांत का प्रयोग करते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा स्तरों वाली कक्षाओं में ही घूम सकते हैं और इन कक्षाओं में रहते हुए वे ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते। इस प्रकार बोर के मॉडल ने स्थिरता की व्याख्या की।

  11. Q11. जे. जे. थॉमसन के परमाणु मॉडल की संरचना को समझाइए। यह मॉडल तरबूज से तुलना क्यों किया जाता था? चित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

    5 अंक
    दीर्घ उत्तरीय
    उत्तर

    थॉमसन का परमाणु मॉडल: इसमें परमाणु एक धनावेशित गोले के समान होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन समाहित रहते हैं। इस मॉडल की तुलना तरबूज से इसलिए की जाती है क्योंकि तरबूज का लाल गूदा धनावेशित भाग को और उसके बीज इलेक्ट्रॉनों को दर्शाते हैं, जो पूरे गोले में वितरित होते हैं। चित्र: एक वृत्त, उसके अंदर धनावेश का संकेत (+) तथा छोटे बिंदु जैसे इलेक्ट्रॉन (-) चारों ओर।

  12. Q12. रदरफोर्ड के मूल प्रयोग में बहुत पतली सोने की पन्नी (लगभग 10⁻⁷ मीटर मोटी) का उपयोग हुआ था। एक छात्र ने सोचा कि यदि इस प्रयोग में पन्नी की मोटाई दुगनी कर दी जाए, तो परिणाम भिन्न होंगे।

    4 अंक
    केस स्टडी
    1. (i) पन्नी की मोटाई बढ़ाने पर अल्फा कणों के प्रकीर्णन (scattering) में क्या अंतर आएगा? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।2 अंक
    2. (ii) क्या इस परिवर्तित प्रयोग के परिणाम रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल को असत्य सिद्ध कर सकते हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।2 अंक
    उत्तर

    मोटी पन्नी पर अधिक विक्षेपण होगा और अधिक कण लौटेंगे, किन्तु इससे रदरफोर्ड का मॉडल असत्य नहीं होगा क्योंकि उसका आधार नाभिक की अवधारणा है, जो टकरावों की संख्या पर निर्भर नहीं करती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग क्या था और इसके प्रमुख प्रेक्षण क्या थे?

रदरफोर्ड ने अल्फा कणों की बमबारी पतली सोने की पन्नी पर की। अधिकांश कण सीधे निकल गए, कुछ विक्षेपित हुए और बहुत कम (लगभग 12000 में 1) वापस लौट आए। इससे निष्कर्ष निकला कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली है, धनावेश एक छोटे से नाभिक में केंद्रित है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर होते हैं।

थॉमसन और रदरफोर्ड के परमाणु मॉडलों में मुख्य अंतर क्या है?

थॉमसन मॉडल में धनावेश पूरे परमाणु में समान रूप से फैला होता है और इलेक्ट्रॉन उसमें धंसे रहते हैं (तरबूज जैसा), जबकि रदरफोर्ड मॉडल में धनावेश एक छोटे से नाभिक में केंद्रित होता है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर चक्कर लगाते हैं। रदरफोर्ड का मॉडल प्रयोगों द्वारा समर्थित था, जबकि थॉमसन का मॉडल अल्फा कण प्रकीर्णन को स्पष्ट नहीं कर सका।

रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल परमाणु की स्थिरता की व्याख्या क्यों नहीं कर पाया?

मैक्सवेल के विद्युत-चुंबकीय सिद्धांत के अनुसार, वृत्तीय पथ पर त्वरित कोई भी आवेशित कण ऊर्जा का विकिरण करता है। इसलिए इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा खोते हुए सर्पिलाकार पथ पर नाभिक में गिर जाने चाहिए थे, जिससे परमाणु अस्थिर होता। इस समस्या का समाधान बाद में बोर ने स्थिर कक्षाओं की अवधारणा से किया।

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