कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर
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qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026
संक्षेप में उत्तर
हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 12 (“विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।
कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 12 "विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव" विद्युत और चुंबकत्व के गहरे संबंध को उजागर करता है। यह अध्याय ओर्स्टेड के ऐतिहासिक प्रयोग से आरंभ होता है, जिसमें एक धारावाही तार के निकट दिक्सूचक की सुई विक्षेपित होती है, यह सिद्ध करता है कि गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं। इसके बाद, चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की अवधारणा, सीधे धारावाही चालक, वृत्ताकार कुंडली और परिनालिका (solenoid) द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र का पैटर्न समझाया जाता है। दाहिने हाथ के अंगूठे का नियम और मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने में सहायक हैं। परिनालिका की चर्चा करते हुए विद्युत चुम्बक का निर्माण और उसकी शक्ति को प्रभावित करने वाले कारकों पर बल दिया गया है। आगे बढ़ते हुए, चुंबकीय क्षेत्र में स्थित धारावाही चालक पर लगने वाले बल का अध्ययन किया जाता है, जो विद्युत मोटर का मूल सिद्धांत है। फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम इस बल की दिशा बताता है। विद्युत चुम्बकीय प्रेरण की घटना, जिसमें बदलते चुंबकीय क्षेत्र से विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है, की व्याख्या की गई है। फ्लेमिंग का दाएँ हाथ का नियम प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करता है। अंत में, ए.सी. और डी.सी. जनित्र तथा घरेलू विद्युत परिपथों की संक्षिप्त जानकारी दी गई है। परीक्षा में इस अध्याय से प्रायः बहुविकल्पीय प्रश्न (जैसे चुंबकीय क्षेत्र का पैटर्न पहचानना), लघु उत्तरीय प्रश्न (जैसे दिक्सूचक के विक्षेप का कारण, चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करना), और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (जैसे विद्युत मोटर या जनित्र का कार्यकारी सिद्धांत और नामांकित चित्र) पूछे जाते हैं। विद्यार्थियों को फ्लेमिंग के नियमों का व्यावहारिक उपयोग और प्रेरित धारा की स्थितियों का अभ्यास आवश्यक है।
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विज्ञान — विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
खंड क
- 1.1
एक DC मोटर में यदि चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली में धारा दोनों की दिशाएँ एक साथ उलट दी जाएँ, तो मोटर के घूर्णन की दिशा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(a) घूर्णन उलट जाएगा(b) घूर्णन दिशा अपरिवर्तित रहेगी(c) मोटर रुक जाएगी(d) मोटर तेज़ी से घूमने लगेगी - 2.1
एक छड़ चुंबक को कुंडली की ओर तेज़ी से ले जाने पर कुंडली से जुड़े गैल्वेनोमीटर में विक्षेप देखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति गैल्वेनोमीटर में विक्षेप उत्पन्न नहीं करेगी?
(a) चुंबक को कुंडली के अंदर स्थिर रखना(b) चुंबक को कुंडली से तेज़ी से दूर ले जाना(c) कुंडली को स्थिर चुंबक की ओर ले जाना(d) कुंडली और चुंबक को समान वेग से एक ही दिशा में ले जाना - 3.1
ऋजुरेखीय धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए किस नियम का उपयोग किया जाता है?
(a) फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम(b) फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम(c) दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम(d) एम्पीयर का परिपथीय नियम
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CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:
| प्रश्न प्रकार | प्रति अंक | हमारे बैंक में |
|---|---|---|
| बहुविकल्पीय (MCQ) | 1 अंक | 13 |
| अभिकथन–कारण | 1 अंक | 6 |
| लघु उत्तरीय | 2 अंक | 8 |
| लघु उत्तरीय | 3 अंक | 6 |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 अंक | 5 |
| केस स्टडी | 4 अंक | 6 |
इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।
महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्न (उत्तर सहित)
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- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q1. एक DC मोटर में यदि चुंबकीय क्षेत्र और कुंडली में धारा दोनों की दिशाएँ एक साथ उलट दी जाएँ, तो मोटर के घूर्णन की दिशा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
1 अंक(A) घूर्णन उलट जाएगा(B) घूर्णन दिशा अपरिवर्तित रहेगी(C) मोटर रुक जाएगी(D) मोटर तेज़ी से घूमने लगेगी▸ उत्तर▾ उत्तर
घूर्णन दिशा अपरिवर्तित रहेगी
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q2. एक छड़ चुंबक को कुंडली की ओर तेज़ी से ले जाने पर कुंडली से जुड़े गैल्वेनोमीटर में विक्षेप देखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति गैल्वेनोमीटर में विक्षेप उत्पन्न नहीं करेगी?
1 अंक(A) चुंबक को कुंडली के अंदर स्थिर रखना(B) चुंबक को कुंडली से तेज़ी से दूर ले जाना(C) कुंडली को स्थिर चुंबक की ओर ले जाना(D) कुंडली और चुंबक को समान वेग से एक ही दिशा में ले जाना▸ उत्तर▾ उत्तर
कुंडली और चुंबक को समान वेग से एक ही दिशा में ले जाना
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q3. ऋजुरेखीय धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए किस नियम का उपयोग किया जाता है?
1 अंक(A) फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम(B) फ्लेमिंग का दायाँ हाथ नियम(C) दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम(D) एम्पीयर का परिपथीय नियम▸ उत्तर▾ उत्तर
दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q4. विद्युत मोटर किस मूल सिद्धांत पर कार्य करती है?
1 अंक(A) चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है(B) विद्युत चुंबकीय प्रेरण(C) धारा का चुंबकीय प्रभाव(D) अन्योन्य प्रेरण▸ उत्तर▾ उत्तर
चुंबकीय क्षेत्र में रखे धारावाही चालक पर बल लगता है
- अभिकथन–कारण
Q5. अभिकथन (A): किसी चालक में गति के कारण प्रेरित धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए फ्लेमिंग का दक्षिण हस्त नियम प्रयुक्त होता है। कारण (R): यह नियम चुम्बकीय क्षेत्र, चालक की गति और प्रेरित धारा की दिशा के बीच संबंध स्थापित करता है।
1 अंक(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।▸ उत्तर▾ उत्तर
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
- लघु उत्तरीय
Q6. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण से आप क्या समझते हैं?
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
जब किसी कुंडली से होकर गुजरने वाली चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या में परिवर्तन होता है, तो कुंडली में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, जिसके कारण प्रेरित धारा प्रवाहित होती है। इस परिघटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहते हैं।
- लघु उत्तरीय
Q7. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
(i) चुम्बक के बाहर ये उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर जाती हैं। (ii) ये एक-दूसरे को कभी नहीं काटती हैं।
- लघु उत्तरीय
Q8. जब किसी धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर लगने वाले बल की दिशा कैसे ज्ञात करते हैं? फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम को समझाइए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
धारावाही चालक पर लगने वाले बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से ज्ञात करते हैं। इस नियम के अनुसार, बाएं हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाएं। तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा, मध्यमा धारा की दिशा, तो अंगूठा बल की दिशा बताता है।
- लघु उत्तरीय
Q9. किसी धारावाही तार के पास लाने पर दिक्सूचक की सुई क्यों विक्षेपित होती है? धारा की दिशा उलटने पर विक्षेप की दिशा भी क्यों उलट जाती है? चुंबकीय प्रभाव की अवधारणा के आधार पर समझाइए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
धारावाही तार अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, जो दिक्सूचक की सुई पर बल लगाता है जिससे वह विक्षेपित होती है। धारा की दिशा बदलने से चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी बदल जाती है, अतः बल की दिशा बदलने से विक्षेप की दिशा उलट जाती है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q10. चुंबकीय क्षेत्र रेखा की परिभाषा लिखिए। चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के कोई चार गुण लिखिए।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
चुंबकीय क्षेत्र रेखा: चुंबकीय क्षेत्र में वह काल्पनिक वक्र रेखा जिसके किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को व्यक्त करती है, चुंबकीय क्षेत्र रेखा कहलाती है। गुण: (i) ये बंद वक्र होती हैं; चुंबक के बाहर उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव की ओर तथा भीतर दक्षिणी से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं। (ii) ये एक-दूसरे को कभी नहीं काटतीं। (iii) जहाँ रेखाएँ सघन होती हैं, वहाँ चुंबकीय क्षेत्र प्रबल होता है। (iv) ये धातु में से गुजरने को प्राथमिकता देती हैं।
- दीर्घ उत्तरीय
Q11. फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम क्या है? इस नियम की सहायता से एक आयताकार कुंडली, जो एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में घूम रही है, में प्रेरित धारा की दिशा निर्धारित करने की विधि समझाइए। इसके आधार पर प्रत्यावर्ती धारा विद्युत जनित्र (AC Generator) की कार्यविधि का वर्णन कीजिए।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम: अपने दाहिने हाथ की तर्जनी को चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में, अंगुष्ठ को चालक की गति की दिशा में रखिए। तब मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा बताएगी। AC जनित्र में, कुंडली चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है। जब कुंडली की भुजाएँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को काटती हैं, प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। प्रत्येक अर्ध-चक्र में भुजाओं की गति की दिशा बदलने से प्रेरित धारा की दिशा विपरीत हो जाती है, जिससे बाह्य परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होती है। विद्युत जनित्र में स्लिप रिंगों का उपयोग होता है जो धारा की दिशा नहीं बदलते, फलतः AC उत्पन्न होता है।
- केस स्टडी
Q12. एक AC जनित्र विद्युत चुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें एक कुंडली होती है जो निश्चित चुंबकीय क्षेत्र में घूमती है। कुंडली के सिरे दो पूर्ण वलयों (स्लिप रिंग) से जुड़े होते हैं, जो कार्बन ब्रशों के माध्यम से बाह्य परिपथ से जुड़ते हैं। कुंडली के घूर्णन के कारण इसमें प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, जो ज्या-वक्रीय रूप से बदलता है। भारत में उत्पन्न AC की आवृत्ति 50 Hz है।
4 अंक- (i) (क) एक सरल AC जनित्र का नामांकित चित्र बनाइए जिसमें कुंडली, स्लिप रिंग, ब्रश और चुंबक दर्शाए गए हों।2 अंक
- (ii) (ख) AC जनित्र में स्लिप रिंग का उपयोग क्यों किया जाता है?1 अंक
- (iii) (ग) भारत में घरेलू वितरण में AC की आवृत्ति कितनी होती है?1 अंक
▸ उत्तर▾ उत्तर
(क) चित्र में कुंडली, चुंबक, स्लिप रिंग, ब्रश दिखाए। (ख) स्लिप रिंग AC धारा की प्रत्यावर्ती प्रकृति बनाए रखते हैं। (ग) 50 Hz।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस अध्याय से परीक्षा में अक्सर कौन से प्रश्न पूछे जाते हैं?
प्रायः चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताने, सोलेनॉइड का चुंबकीय क्षेत्र खींचने, विद्युत मोटर का सिद्धांत और कार्यविधि, तथा विद्युत चुम्बकीय प्रेरण पर आधारित प्रश्न आते हैं। दिक्सूचक के विक्षेप और फ्लेमिंग के नियमों के अनुप्रयोग भी महत्वपूर्ण हैं।
फ्लेमिंग के बाएँ और दाएँ हाथ के नियम में अंतर कैसे याद रखें?
बाएँ हाथ का नियम मोटर के लिए है (बल, चुंबकीय क्षेत्र, धारा), जबकि दाएँ हाथ का नियम जनित्र या प्रेरित धारा के लिए। सरल स्मरण: बायां हाथ = मोटर, दायां हाथ = जनित्र।
सीधे धारावाही तार के पास दिक्सूचक की सुई क्यों घूम जाती है?
क्योंकि धारावाही तार अपने चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है, जो दिक्सूचक की चुंबकीय सुई पर बल लगाकर उसे विक्षेपित कर देता है। यह ओर्स्टेड का प्रयोग है।
क्या स्थिर कुंडली और स्थिर चुंबक में प्रेरित धारा बहती है?
नहीं, प्रेरित धारा केवल तब उत्पन्न होती है जब चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन हो, अर्थात चुंबक और कुंडली के बीच आपेक्षिक गति अनिवार्य है। यदि दोनों स्थिर हैं, तो कोई धारा प्रेरित नहीं होगी।
अन्य अध्याय
- अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
- अध्याय 2: अम्ल, क्षारक और लवण
- अध्याय 3: धातु और अधातु
- अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक
- अध्याय 5: जैव प्रक्रम
- अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय
- अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?
- अध्याय 8: आनुवंशिकता
- अध्याय 9: प्रकाश - परावर्तन एवं अपवर्तन
- अध्याय 10: मानव नेत्र और रंगीन संसार
- अध्याय 11: विद्युत
- अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
- अध्याय 13: हमारा पर्यावरण