कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5: जैव प्रक्रम — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर
उत्तर सहित महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्नों का अभ्यास करें, CBSE अंक-विभाजन व ब्लूप्रिंट देखें, या पूरा नमूना प्रश्नपत्र बनाएँ — मुफ़्त, 2026-27 के लिए।
qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026
संक्षेप में उत्तर
हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 5 (“जैव प्रक्रम”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।
कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 5 'जैव प्रक्रम' सजीवों के जीवन को बनाए रखने वाली आवश्यक क्रियाओं पर केंद्रित है। इसमें पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन जैसे मुख्य प्रक्रमों की विस्तृत व्याख्या है। पोषण में स्वपोषी (पादपों में प्रकाश-संश्लेषण) और परपोषी प्रकार, मानव का पाचन तंत्र शामिल हैं। श्वसन के अंतर्गत वायवीय और अवायवीय श्वसन की तुलना, मानव श्वसन तंत्र और ऊर्जा उत्पादन को समझाया गया है। परिवहन में पादपों में जाइलम और फ्लोएम द्वारा जल व भोज्य पदार्थों का स्थानांतरण तथा मानव में हृदय, रक्त वाहिनियाँ और दोहरा परिसंचरण शामिल हैं। उत्सर्जन में मानव के वृक्क और नेफ्रॉन की संरचना एवं कार्यविधि पर प्रकाश डाला गया है। परीक्षा में इस अध्याय से अक्सर दोहरे परिसंचरण का महत्व, प्रकाश-संश्लेषण के कारक, वायवीय बनाम अवायवीय श्वसन, प्लाज्मा का कार्य, पसीने की ग्रंथियों का तापमान नियंत्रण, और पादपों में परिवहन ऊतकों की विशेषताएं जैसे प्रश्न पूछे जाते हैं। इस अध्याय को अच्छी तरह समझने के लिए चित्रों सहित प्रमुख प्रकरणों का अभ्यास आवश्यक है।
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विज्ञान — जैव प्रक्रम
खंड क
- 1.1
मानव हृदय में फेफड़ों से आने वाला ऑक्सीजनित रक्त सबसे पहले किस कक्ष में प्रवेश करता है?
(a) दायाँ आलिंद(b) दायाँ निलय(c) बायाँ आलिंद(d) बायाँ निलय - 2.1
एक व्यक्ति का रक्त दाब 160/100 mmHg मापा गया। इसमें '160' किस दाब को इंगित करता है?
(a) प्रकुंचन दाब(b) अनुशिथिलन दाब(c) नाड़ी दर(d) डायलिसिस दाब - 3.1
वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है –
(a) नेफ्रॉन(b) न्यूरॉन(c) एल्वियोली(d) ग्लोमेरुलस
पूरे पेपर में 41 और प्रश्न
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CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:
| प्रश्न प्रकार | प्रति अंक | हमारे बैंक में |
|---|---|---|
| बहुविकल्पीय (MCQ) | 1 अंक | 13 |
| अभिकथन–कारण | 1 अंक | 6 |
| लघु उत्तरीय | 2 अंक | 8 |
| लघु उत्तरीय | 3 अंक | 6 |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 अंक | 5 |
| केस स्टडी | 4 अंक | 6 |
इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।
महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्न (उत्तर सहित)
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- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q1. मानव हृदय में फेफड़ों से आने वाला ऑक्सीजनित रक्त सबसे पहले किस कक्ष में प्रवेश करता है?
1 अंक(A) दायाँ आलिंद(B) दायाँ निलय(C) बायाँ आलिंद(D) बायाँ निलय▸ उत्तर▾ उत्तर
बायाँ आलिंद
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q2. एक व्यक्ति का रक्त दाब 160/100 mmHg मापा गया। इसमें '160' किस दाब को इंगित करता है?
1 अंक(A) प्रकुंचन दाब(B) अनुशिथिलन दाब(C) नाड़ी दर(D) डायलिसिस दाब▸ उत्तर▾ उत्तर
प्रकुंचन दाब
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q3. वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है –
1 अंक(A) नेफ्रॉन(B) न्यूरॉन(C) एल्वियोली(D) ग्लोमेरुलस▸ उत्तर▾ उत्तर
नेफ्रॉन
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q4. एक धावक 100 मीटर की दौड़ लगाता है। इस दौरान उसकी पेशी कोशिकाओं में ऊर्जा मुख्यतः किस प्रक्रिया से प्राप्त होती है?
1 अंक(A) वायवीय श्वसन(B) अवायवीय श्वसन(C) प्रकाश-संश्लेषण(D) किण्वन▸ उत्तर▾ उत्तर
अवायवीय श्वसन
- अभिकथन–कारण
Q5. अभिकथन (A): मानव में वृक्क की कार्यात्मक इकाई नेफ्रॉन है। कारण (R): प्रत्येक नेफ्रॉन में एक ग्लोमेरुलस और एक वृक्क नलिका होती है जो रक्त को छानकर मूत्र बनाते हैं।
1 अंक(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।▸ उत्तर▾ उत्तर
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
- लघु उत्तरीय
Q6. पादपों में जल और खनिज लवणों का परिवहन किस ऊतक द्वारा होता है? इस ऊतक की कोशिकाएँ कैसी होती हैं?
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
जाइलम द्वारा; इसकी कोशिकाएँ मृत, लम्बी और नलिकाकार होती हैं तथा इनमें लिग्निन जमा होता है।
- लघु उत्तरीय
Q7. एक रोगी को साँस लेने में कठिनाई के साथ-साथ खाँसी और बलगम आ रहा है। चिकित्सक ने बताया कि उसके फेफड़ों की वायुकोष्ठिकाएँ (एल्वियोलाई) संक्रमित हैं। बताइए कि इस स्थिति में गैस विनिमय कैसे प्रभावित होगा और क्यों? इसके अतिरिक्त, श्वसन तंत्र का कौन-सा भाग प्रभावित होने पर गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है?
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
संक्रमण के कारण एल्वियोलाई की भित्तियाँ मोटी हो जाती हैं तथा उनमें तरल (बलगम) भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का विसरण धीमा पड़ जाता है और गैस विनिमय बाधित होता है। परिणामस्वरूप रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। यदि श्वसन केंद्र (मेडुला ऑब्लॉन्गेटा) प्रभावित हो, तो श्वास क्रिया रुक सकती है, जो घातक होगा।
- लघु उत्तरीय
Q8. मानव पाचन तंत्र में लार ग्रंथियों की भूमिका को समझाइए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
लार ग्रंथियाँ लार (सलाइवा) का स्रावण करती हैं जिसमें लार एमाइलेज (टायलिन) नामक एंजाइम पाया जाता है। यह एंजाइम स्टार्च (मंड) को सरल शर्करा माल्टोज में विखंडित करता है। इसके अलावा, लार भोजन को नम करके चबाने और निगलने में सहायता करता है।
- लघु उत्तरीय
Q9. यदि किसी पादप की जड़ों को लंबे समय तक ऑक्सीजन-रहित जल में उगाया जाए, तो उसके खनिज अवशोषण पर क्या प्रभाव पड़ेगा? जड़ों की कोशिकाओं में सक्रिय परिवहन की प्रक्रिया के संदर्भ में व्याख्या कीजिए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
ऑक्सीजन-रहित जल में जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, जिससे कोशिकीय श्वसन बाधित होगा। कोशिकीय श्वसन से प्राप्त ऊर्जा (ATP) का उपयोग सक्रिय परिवहन में होता है, जिसके द्वारा जड़ें खनिज लवणों का अवशोषण सांद्रता प्रवणता के विपरीत करती हैं। ऑक्सीजन के अभाव में एटीपी का उत्पादन नहीं होगा, फलस्वरूप सक्रिय परिवहन बंद हो जाएगा। परिणामस्वरूप, जड़ें पोटैशियम, नाइट्रेट, फॉस्फेट जैसे आवश्यक खनिज अवशोषित नहीं कर पाएंगी, जिससे पादप में पोषक तत्वों की कमी हो जाएगी और उसकी वृद्धि रुक सकती है। यह ध्यान रखना होगा कि जल का अवशोषण अधिकतर परासरण द्वारा निष्क्रिय होता है, इसलिए जल अवशोषण पर आंशिक प्रभाव ही पड़ सकता है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q10. पादपों में प्रकाश-संश्लेषण की क्रियाविधि के प्रमुख चरणों का वर्णन करें। इस प्रक्रिया में सूर्य के प्रकाश का क्या महत्त्व है तथा यह कहाँ संपन्न होती है?
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
प्रकाश-संश्लेषण मुख्यतः क्लोरोप्लास्ट में होता है। इसके दो चरण हैं—प्रकाश अभिक्रिया और अप्रकाश अभिक्रिया। **प्रकाश अभिक्रिया (लाइट रिएक्शन):** यह क्लोरोप्लास्ट के ग्राना में होती है। सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरोफिल सक्रिय होता है और जल का प्रकाश-अपघटन करता है। इससे ऑक्सीजन मुक्त होती है और ATP तथा NADPH2 बनते हैं। **अप्रकाश अभिक्रिया (डार्क रिएक्शन):** यह क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होती है। इसमें प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती, परंतु प्रकाश अभिक्रिया में बने ATP और NADPH2 का उपयोग कर CO2 का अपचयन होता है और ग्लूकोज़ बनता है। **सूर्य के प्रकाश का महत्त्व:** प्रकाश ऊर्जा का स्रोत है, जो जल के प्रकाश-अपघटन और उच्च ऊर्जा अणुओं के निर्माण के लिए आवश्यक है। **स्थान:** संपूर्ण प्रक्रिया पादप कोशिकाओं के क्लोरोप्लास्ट में संपन्न होती है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q11. यदि अमीबा और मनुष्य की पोषण प्रणालियों की तुलना की जाये, तो आप किन मूलभूत समानताओं और अंतरों को देखते हैं? यह कैसे सिद्ध करता है कि जटिलता के अनुसार जैव प्रक्रम विकसित होते हैं?
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
**समानताएँ:** - दोनों में पोषण के चरण: अंतर्ग्रहण → पाचन → अवशोषण → स्वांगीकरण → निष्कासन। - दोनों पाचन के लिए एंजाइमों का स्रवण करते हैं। - दोनों विषमपोषी हैं, भोजन पर निर्भर। **अंतर:** - अमीबा में संपूर्ण पोषण एक कोशिका के अंदर होता है (कोशिकांतर पाचन); खाद्य रसधानी में एंजाइम कार्य करते हैं। मनुष्य में विशेषीकृत अंग और ग्रंथियाँ हैं, पाचन मुख्यतः कोशिकाबाह्य होता है। - अमीबा में भोजन ग्रहण कूटपाद द्वारा भक्षण द्वारा होता है; मनुष्य में मुँह द्वारा। - अमीबा अपशिष्ट को कोशिका झिल्ली से बाहर फेंकता है; मनुष्य में गुदा से निष्कासन। **जटिलता और जैव प्रक्रम का विकास:** एककोशिकीय जीव जैसे अमीबा में सभी जैव प्रक्रम एक ही कोशिका में संपन्न होते हैं, परंतु बहुकोशिकीय जीवों में कार्य-विभाजन और विशेषीकरण बढ़ जाता है। यह दर्शाता है कि जीव की संरचनात्मक जटिलता के साथ पोषण जैसे जैव प्रक्रम अधिक संगठित और कुशल हो जाते हैं, जो क्रमिक विकास का प्रमाण है।
- केस स्टडी
Q12. एक लंबे वृक्ष को जड़ों से पत्तियों तक जल पहुँचाना होता है। एक छात्रा समझाती है कि इस प्रक्रिया में वाष्पोत्सर्जन सहायक होता है, परंतु वह इस बात से भ्रमित है कि बिना किसी पंप के जल गुरुत्व के विरुद्ध कैसे ऊपर चढ़ता है।
4 अंक- (i) वृक्ष में जल के ऊपर चढ़ने (रसारोहण) में वाष्पोत्सर्जन की भूमिका समझाइए।2 अंक
- (ii) मूल दाब और वाष्पोत्सर्जन खिंचाव किस प्रकार मिलकर कार्य करते हैं?1 अंक
- (iii) आर्द्र दिन में जल परिवहन की दर कैसी होगी? कारण बताइए।1 अंक
▸ उत्तर▾ उत्तर
(a) वाष्पोत्सर्जन पत्तियों में खिंचाव उत्पन्न करता है जो ससंजन-आसंजन बलों द्वारा जाइलम जल को ऊपर खींचता है। (b) मूल दाब जल को धकेलता है और वाष्पोत्सर्जन खिंचाव खींचता है; दोनों मिलकर जल परिवहन सुनिश्चित करते हैं। (c) आर्द्र दिन में वाष्पोत्सर्जन कम होने से जल परिवहन धीमा हो जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 10 विज्ञान अध्याय जैव प्रक्रम में सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक कौन-से हैं?
इस अध्याय में परीक्षा की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक हैं: प्रकाश-संश्लेषण की क्रियाविधि एवं कारक, मानव पाचन तंत्र के विभिन्न भाग और एंजाइमों की भूमिका, वायवीय एवं अवायवीय श्वसन में तुलना, मानव हृदय में दोहरा परिसंचरण का महत्व और मार्ग, वृक्क एवं नेफ्रॉन की संरचना द्वारा उत्सर्जन, तथा पादपों में जाइलम एवं फ्लोएम का परिवहन।
दोहरा परिसंचरण क्या होता है और इसकी आवश्यकता क्यों है?
दोहरा परिसंचरण वह प्रक्रिया है जिसमें रक्त हृदय से दो बार गुजरता है—पहले फेफड़ों में शुद्धिकरण के लिए और फिर शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सीजन व पोषक तत्व पहुँचाने के लिए। इसकी आवश्यकता इसलिए है ताकि ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त मिश्रित न हों, और ऊर्जावान जंतुओं में उच्च दाब से रक्त संचार हो सके।
वायवीय और अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है?
वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, ग्लूकोज का पूर्ण विघटन कर CO2, जल और अधिक ऊर्जा (38 ATP) उत्पन्न करता है। अवायवीय श्वसन बिना ऑक्सीजन के होता है, आंशिक विघटन कर इथेनॉल/लैक्टिक अम्ल और CO2 व कम ऊर्जा (2 ATP) देता है। यह मुख्यतः सूक्ष्मजीवों और अल्पऑक्सीजन अवस्था में मांसपेशियों में होता है।
पादपों में जल और खनिज लवणों का परिवहन कैसे होता है?
पादपों में जल और खनिज लवणों का परिवहन जाइलम ऊतक द्वारा होता है। जाइलम वाहिकाएँ मृत कोशिकाओं से बनी लंबी नली होती हैं, जो जड़ों से पत्तियों तक जल का वाष्पोत्सर्जन खिंचाव द्वारा संचालन करती हैं। खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण फ्लोएम द्वारा होता है।
अन्य अध्याय
- अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
- अध्याय 2: अम्ल, क्षारक और लवण
- अध्याय 3: धातु और अधातु
- अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक
- अध्याय 5: जैव प्रक्रम
- अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय
- अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?
- अध्याय 8: आनुवंशिकता
- अध्याय 9: प्रकाश - परावर्तन एवं अपवर्तन
- अध्याय 10: मानव नेत्र और रंगीन संसार
- अध्याय 11: विद्युत
- अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
- अध्याय 13: हमारा पर्यावरण