कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3: धातु और अधातु — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर
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qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026
संक्षेप में उत्तर
हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 3 (“धातु और अधातु”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।
कक्षा 10 विज्ञान का पाठ 3 'धातु और अधातु' रसायन विज्ञान का एक आधारभूत अध्याय है, जो तत्वों के दो मुख्य वर्गों के गुणों, अभिक्रियाओं और उपयोगों की गहन समझ विकसित करता है। इस अध्याय में छात्र धातुओं और अधातुओं के भौतिक गुणों (जैसे चमक, आघातवर्ध्यता, तन्यता, विद्युत चालकता) और रासायनिक गुणों (जैसे ऑक्सीजन, जल, अम्लों से अभिक्रियाएं) का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं। धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी और विस्थापन अभिक्रियाओं की अवधारणा को प्रयोगों द्वारा स्पष्ट किया जाता है। आयनिक बंध का निर्माण, जैसे मैग्नीशियम क्लोराइड में इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण, और आयनिक यौगिकों के गुणधर्म इस अध्याय की महत्वपूर्ण बुनियाद हैं। साथ ही, खनिज और अयस्क में अंतर, धातु निष्कर्षण की विधियाँ (सल्फाइड अयस्कों का भर्जन, कार्बन द्वारा अपचयन, विद्युत अपघटनी परिष्करण) और एलुमिनियम जैसी धातुओं का निष्कर्षण क्रायोलाइट की भूमिका सहित समझाया गया है। संक्षारण और उसकी रोकथाम के उपाय भी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा में इस अध्याय से विस्थापन अभिक्रियाओं पर आधारित कारण बताइए, इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए, आयनिक यौगिकों के गुण लिखिए, तथा निष्कर्षण की विधियों का वर्णन जैसे प्रश्न पूछे जाते हैं।
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विज्ञान — धातु और अधातु
खंड क
- 1.1
धातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः किस प्रकृति के होते हैं?
(a) अम्लीय(b) क्षारीय(c) उभयधर्मी(d) उदासीन - 2.1
ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण (electrolytic refining) में, अशुद्ध ताँबे की प्लेट को किस रूप में उपयोग किया जाता है?
(a) कैथोड(b) एनोड(c) इलेक्ट्रोलाइट(d) अपशिष्ट - 3.1
निम्नलिखित में से कौन-सा अधातु विद्युत का सुचालक है?
(a) सल्फर(b) ग्रेफाइट(c) फॉस्फोरस(d) क्लोरीन
पूरे पेपर में 41 और प्रश्न
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CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:
| प्रश्न प्रकार | प्रति अंक | हमारे बैंक में |
|---|---|---|
| बहुविकल्पीय (MCQ) | 1 अंक | 13 |
| अभिकथन–कारण | 1 अंक | 6 |
| लघु उत्तरीय | 2 अंक | 8 |
| लघु उत्तरीय | 3 अंक | 6 |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 अंक | 5 |
| केस स्टडी | 4 अंक | 6 |
इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।
महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्न (उत्तर सहित)
अभ्यास व पुनरावृत्ति के लिए असली, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — हर प्रश्न उत्तर सहित। असीमित प्रश्नों के लिए पूरा प्रश्नपत्र बनाएँ।
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q1. धातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः किस प्रकृति के होते हैं?
1 अंक(A) अम्लीय(B) क्षारीय(C) उभयधर्मी(D) उदासीन▸ उत्तर▾ उत्तर
क्षारीय
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q2. ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण (electrolytic refining) में, अशुद्ध ताँबे की प्लेट को किस रूप में उपयोग किया जाता है?
1 अंक(A) कैथोड(B) एनोड(C) इलेक्ट्रोलाइट(D) अपशिष्ट▸ उत्तर▾ उत्तर
एनोड
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सा अधातु विद्युत का सुचालक है?
1 अंक(A) सल्फर(B) ग्रेफाइट(C) फॉस्फोरस(D) क्लोरीन▸ उत्तर▾ उत्तर
ग्रेफाइट
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q4. जिंक सल्फेट (ZnSO₄) के विलयन में से जिंक को कौन-सी धातु विस्थापित कर सकती है?
1 अंक(A) Cu(B) Fe(C) Mg(D) Ag▸ उत्तर▾ उत्तर
Mg
- अभिकथन–कारण
Q5. अभिकथन (A): ठोस अवस्था में सोडियम क्लोराइड विद्युत का चालन नहीं करता है। कारण (R): सोडियम क्लोराइड एक आयनिक यौगिक है।
1 अंक(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।▸ उत्तर▾ उत्तर
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।
- लघु उत्तरीय
Q6. एक अयस्क को वायु में गर्म करने पर सल्फर डाइऑक्साइड गैस निकलती है। उस धातु का नाम बताइए जो ऐसे अयस्क से निष्कर्षित की जा सकती है। उसके सल्फाइड अयस्क से धातु निष्कर्षण के चरणों का उल्लेख कीजिए।
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
एक उदाहरण ताँबा है, जो कॉपर ग्लांस (Cu₂S) से प्राप्त होता है। सल्फाइड अयस्क से निष्कर्षण के चरण: 1. सांद्रण (फेन उत्प्लावन), 2. भर्जन: सांद्रित अयस्क को वायु में गर्म करने पर आंशिक ऑक्सीकरण होता है, 2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂, 3. अपचयन: बिना वायु के गर्म करने पर Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂। अंत में विद्युत अपघटनी परिष्करण।
- लघु उत्तरीय
Q7. मिश्र धातु किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु और एक अधातु को मिलाकर बनने वाले समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं। उदाहरण: पीतल (ताँबा + जस्ता)।
- लघु उत्तरीय
Q8. एक अयस्क (ore) 'X' को वायु में भर्जित करने पर एक ठोस 'Y' प्राप्त होता है। 'Y' अपने उसी धातु के साथ कार्बन की उपस्थिति में अपचयित करने पर धातु 'Z' प्राप्त होती है। 'X', 'Y' और 'Z' को पहचानिए तथा सम्मिलित रासायनिक अभिक्रियाएँ लिखिए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
X = कॉपर ग्लांस (Cu₂S), Y = क्यूप्रस ऑक्साइड (Cu₂O), Z = कॉपर (Cu)। भर्जन: 2Cu₂S + 3O₂ → 2Cu₂O + 2SO₂। अपचयन: 2Cu₂O + Cu₂S → 6Cu + SO₂।
- लघु उत्तरीय
Q9. जिंक, कॉपर सल्फेट विलयन से कॉपर विस्थापित कर सकता है, परंतु मैग्नीशियम सल्फेट से मैग्नीशियम विस्थापित नहीं कर सकता। क्यों? स्पष्ट कीजिए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
जिंक की क्रियाशीलता कॉपर से अधिक है, इसलिए यह CuSO₄ विलयन से Cu विस्थापित कर देता है। परंतु मैग्नीशियम जिंक से अधिक क्रियाशील है, इसलिए जिंक, MgSO₄ से Mg विस्थापित नहीं कर सकता। यह क्रियाशीलता श्रेणी पर आधारित है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q10. इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण द्वारा मैग्नीशियम क्लोराइड (MgCl2) के निर्माण की व्याख्या कीजिए। Mg तथा Cl की इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना बनाइए। आयनिक यौगिकों के कोई दो गुणधर्म लिखिए।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
Mg (परमाणु क्रमांक 12) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,2 है। इसमें 2 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। Cl (परमाणु क्रमांक 17) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,7 है। इसमें 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन हैं। Mg अपने दोनों संयोजी इलेक्ट्रॉन त्यागकर स्थायी Mg2+ आयन बनाता है, जबकि Cl का एक परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर Cl– आयन बनाता है। एक Mg2+ आयन से साथ दो Cl– आयन विद्युत आकर्षण बल द्वारा बँधकर MgCl2 बनाते हैं। इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना: Mg: Mg के चारों ओर दो बिंदु (संयोजी इलेक्ट्रॉन) Cl: Cl के चारों ओर सात बिंदु Mg2+: कोई बिंदु नहीं, Cl–: Cl के चारों ओर आठ बिंदु (अष्टक पूर्ण) आयनिक यौगिकों के दो गुणधर्म: 1. इनके गलनांक और क्वथनांक बहुत उच्च होते हैं। 2. ये ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं, किंतु जलीय विलयन या गलित अवस्था में विद्युत के सुचालक होते हैं।
- दीर्घ उत्तरीय
Q11. एलुमिनियम को उसके ऑक्साइड से कार्बन द्वारा अपचयन करके प्राप्त नहीं किया जा सकता। क्यों? एलुमिनियम के निष्कर्षण की विद्युत अपघटनी विधि का वर्णन कीजिए जिसमें क्रायोलाइट की भूमिका, उपयोग किए जाने वाले इलेक्ट्रोड, तथा ऐनोड एवं कैथोड पर होने वाली अभिक्रियाओं को शामिल कीजिए।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
एलुमिनियम ऑक्सीजन के प्रति उच्च बंधुता रखने वाली अत्यधिक अभिक्रियाशील धातु है। यह कार्बन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील है, अतः कार्बन, Al2O3 से ऑक्सीजन पृथक करके एलुमिनियम का अपचयन नहीं कर सकता। एलुमिनियम निष्कर्षण की विद्युत अपघटनी विधि (हॉल-हीरोल्ट प्रक्रम): - एलुमिना (Al2O3) का गलनांक बहुत उच्च (2040°C) होता है, इसे कम करने और विद्युत चालकता बढ़ाने के लिए इसमें क्रायोलाइट (Na3AlF6) तथा कैल्सियम फ्लुओराइड (CaF2) मिलाया जाता है। इस मिश्रण का गलनांक लगभग 950°C हो जाता है। - विद्युत अपघटन एक कार्बन पात्र (कैथोड) में किया जाता है जिसकी भीतरी परत ग्रैफाइट की बनी होती है। ऐनोड के रूप में ग्रैफाइट की छड़ें उपयोग में लाई जाती हैं। - विद्युत धारा प्रवाहित करने पर: कैथोड पर: Al3+ + 3e– → Al (पिघली हुई एलुमिनियम जमा होती है) ऐनोड पर: 2O2– → O2 + 4e– उत्पन्न ऑक्सीजन ग्रैफाइट ऐनोड से क्रिया कर CO2 बनाती है: C(s) + O2(g) → CO2(g) इस कारण ऐनोड धीरे-धीरे घिसता रहता है और उसे समय-समय पर बदलना पड़ता है। इस प्रक्रिया में क्रायोलाइट, एलुमिना के गलनांक को कम करके ऊर्जा की बचत करता है।
- केस स्टडी
Q12. सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) एक आयनिक यौगिक है। इसका गलनांक बहुत उच्च होता है और यह जल में विलेय है परंतु पेट्रोल में नहीं।
4 अंक- (i) इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण द्वारा NaCl के निर्माण को इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना द्वारा समझाइए।2 अंक
- (ii) NaCl का गलनांक उच्च क्यों होता है?1 अंक
- (iii) NaCl जल में विलेय है पर पेट्रोल में नहीं, क्यों?1 अंक
▸ उत्तर▾ उत्तर
NaCl का निर्माण इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण से होता है। उच्च गलनांक का कारण प्रबल आयनिक बंध है। यह जल में विलेय है क्योंकि जल ध्रुवीय है जो आयनों को स्थायी करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रेणी का उपयोग विस्थापन अभिक्रियाओं में कैसे होता है?
अभिक्रियाशीलता श्रेणी में ऊपर की धातुएँ अधिक अभिक्रियाशील होती हैं और वे नीचे की धातुओं को उनके लवण विलयनों से विस्थापित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, जिंक कॉपर सल्फेट से कॉपर को विस्थापित कर सकता है, लेकिन यह मैग्नीशियम को उसके लवण से नहीं हटा सकता क्योंकि मैग्नीशियम श्रेणी में जिंक से ऊपर है।
इस अध्याय में आयनिक बंध से परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
प्रायः विद्यार्थियों से पूछा जाता है कि वे इलेक्ट्रॉन बिंदु संरचना द्वारा MgCl2 या NaCl जैसे आयनिक यौगिकों का निर्माण समझाएँ। साथ ही, आयनिक यौगिकों के गुण (उच्च गलनांक, जल में विलेयता, विलयन में विद्युत चालकता) लिखने या इनकी तुलना सहसंयोजक यौगिकों से करने वाले प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं।
धातु निष्कर्षण के चरणों को संक्षेप में कैसे समझें?
तीन मुख्य चरण हैं: (1) सांद्रण, जिसमें अयस्क से अशुद्धियाँ हटाई जाती हैं; (2) निष्कर्षण, जहाँ अयस्क को ऑक्साइड में बदला जाता है (सल्फाइड के लिए भर्जन, कार्बोनेट के लिए निस्तापन) और फिर उपयुक्त अपचायक (कार्बन या विद्युत अपघटन) से धातु प्राप्त की जाती है; (3) परिष्करण, जिसमें अशुद्ध धातु को विद्युत-अपघटनी विधि से शुद्ध किया जाता है। एलुमिनियम जैसी सक्रिय धातु के लिए विद्युत अपघटनी अपचयन आवश्यक है, जिसमें क्रायोलाइट गलनांक कम करने में मदद करता है।
अन्य अध्याय
- अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
- अध्याय 2: अम्ल, क्षारक और लवण
- अध्याय 3: धातु और अधातु
- अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक
- अध्याय 5: जैव प्रक्रम
- अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय
- अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?
- अध्याय 8: आनुवंशिकता
- अध्याय 9: प्रकाश - परावर्तन एवं अपवर्तन
- अध्याय 10: मानव नेत्र और रंगीन संसार
- अध्याय 11: विद्युत
- अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
- अध्याय 13: हमारा पर्यावरण