कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8: आनुवंशिकता — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर
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qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026
संक्षेप में उत्तर
हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 8 (“आनुवंशिकता”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।
कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 8 'आनुवंशिकता' जीवों में लक्षणों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थानांतरण के सिद्धांतों को समझाता है। यह अध्याय मुख्य रूप से ग्रेगर मेंडल द्वारा मटर के पौधों पर किए गए प्रयोगों पर आधारित है, जिसमें एकल संकर (मोनोहाइब्रिड) एवं द्विसंकर (डाइहाइब्रिड) क्रॉस से प्राप्त परिणामों का विश्लेषण किया गया है। इसमें प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षणों की अवधारणा, जीन एवं एलील की भूमिका, तथा मेंडल के आनुवंशिकता के तीन नियमों (प्रभाविता का नियम, पृथक्करण का नियम, एवं स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम) को विस्तार से समझाया गया है। इसके अतिरिक्त, लिंग निर्धारण की क्रियाविधि, विशेष रूप से मानव में XY गुणसूत्र प्रणाली, तथा रक्त समूह जैसे बहुएलीलिक लक्षणों की वंशागति पर भी चर्चा की गई है। परीक्षा में इस अध्याय से विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं, जैसे मेंडल के नियमों की व्याख्या, एकल एवं द्विसंकर संकरण प्रयोगों को श्रेणीगत रूप से समझाना, जीनोटाइप एवं फीनोटाइप अनुपात की गणना, तथा लिंग निर्धारण की प्रक्रिया का वर्णन। बहुविकल्पीय प्रश्न अक्सर प्रभावी-अप्रभावी लक्षणों, जीन संरचना तथा आनुवंशिकी की बुनियादी शब्दावली पर आधारित होते हैं। इस अध्याय की गहरी समझ छात्रों को आनुवंशिकी के मूलभूत सिद्धांतों से न केवल परिचित कराती है बल्कि उच्च कक्षाओं में विकास एवं जैव प्रौद्योगिकी जैसे विषयों की नींव भी रखती है।
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विज्ञान — आनुवंशिकता
खंड क
- 1.1
मेंडल के मटर के पौधों में बौने पौधों का प्रभावी या अप्रभावी होना किस पर निर्भर करता है?
(a) यह प्रभावी है(b) यह अप्रभावी है(c) सह-प्रभावी(d) अपूर्ण प्रभावी - 2.1
एक मटर के पौधे में, लंबा तना (T) बौने (t) पर प्रभावी है और हरे बीज (G) पीले (g) पर प्रभावी हैं। एक पौधा जो लंबे तने और हरे बीज वाला है लेकिन विषमयुग्मजी है, का जीनोटाइप क्या होगा?
(a) TTGG(b) TtGg(c) Ttgg(d) ttGg - 3.1
समयुग्मजी (Homozygous) और विषमयुग्मजी (Heterozygous) में अंतर क्या है?
(a) समयुग्मजी में दोनों एलील समान होते हैं, विषमयुग्मजी में भिन्न(b) समयुग्मजी में एलील भिन्न होते हैं, विषमयुग्मजी में समान(c) दोनों में एलील समान होते हैं(d) दोनों में एलील भिन्न होते हैं
पूरे पेपर में 41 और प्रश्न
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CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:
| प्रश्न प्रकार | प्रति अंक | हमारे बैंक में |
|---|---|---|
| बहुविकल्पीय (MCQ) | 1 अंक | 13 |
| अभिकथन–कारण | 1 अंक | 6 |
| लघु उत्तरीय | 2 अंक | 8 |
| लघु उत्तरीय | 3 अंक | 6 |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 अंक | 5 |
| केस स्टडी | 4 अंक | 6 |
इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।
महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्न (उत्तर सहित)
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- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q1. मेंडल के मटर के पौधों में बौने पौधों का प्रभावी या अप्रभावी होना किस पर निर्भर करता है?
1 अंक(A) यह प्रभावी है(B) यह अप्रभावी है(C) सह-प्रभावी(D) अपूर्ण प्रभावी▸ उत्तर▾ उत्तर
यह अप्रभावी है
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q2. एक मटर के पौधे में, लंबा तना (T) बौने (t) पर प्रभावी है और हरे बीज (G) पीले (g) पर प्रभावी हैं। एक पौधा जो लंबे तने और हरे बीज वाला है लेकिन विषमयुग्मजी है, का जीनोटाइप क्या होगा?
1 अंक(A) TTGG(B) TtGg(C) Ttgg(D) ttGg▸ उत्तर▾ उत्तर
TtGg
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q3. समयुग्मजी (Homozygous) और विषमयुग्मजी (Heterozygous) में अंतर क्या है?
1 अंक(A) समयुग्मजी में दोनों एलील समान होते हैं, विषमयुग्मजी में भिन्न(B) समयुग्मजी में एलील भिन्न होते हैं, विषमयुग्मजी में समान(C) दोनों में एलील समान होते हैं(D) दोनों में एलील भिन्न होते हैं▸ उत्तर▾ उत्तर
समयुग्मजी में दोनों एलील समान होते हैं, विषमयुग्मजी में भिन्न
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q4. सामान्यतः मनुष्य में लिंग निर्धारण किस गुणसूत्र पर निर्भर करता है?
1 अंक(A) पिता का X गुणसूत्र(B) पिता का Y गुणसूत्र(C) माता का X गुणसूत्र(D) माता का Y गुणसूत्र▸ उत्तर▾ उत्तर
पिता का Y गुणसूत्र
- अभिकथन–कारण
Q5. अभिकथन (A): एक संकर क्रॉस के F2 पीढ़ी का जीनोटाइप अनुपात 1:2:1 होता है। कारण (R): यह अनुपात पृथक्करण के नियम के कारण प्राप्त होता है।
1 अंक(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।▸ उत्तर▾ उत्तर
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
- लघु उत्तरीय
Q6. एक पुरुष का रक्त समूह A एवं महिला का रक्त समूह B है। इनके बच्चों में संभावित रक्त समूहों की जीनरूपी संभावनाओं की गणना कीजिए।
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
यदि पुरुष IAIA या IAi और महिला IBIB या IBi है, तो बच्चों में A, B, AB, या O रक्त समूह हो सकते हैं। यदि पुरुष IAi और महिला IBi है, तो संतान में IAIB (AB), IAi (A), IBi (B), ii (O) प्रत्येक की 25% संभावना है।
- लघु उत्तरीय
Q7. शुद्ध लंबे (TT) तथा शुद्ध बौने (tt) मटर के पौधों के संकरण से प्राप्त F1 पीढ़ी के स्वपरागण से उत्पन्न F2 पीढ़ी के प्ररूपी तथा जीनरूपी अनुपात ज्ञात कीजिए।
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
F1 पीढ़ी: सभी लंबे (Tt)। F2 पीढ़ी: प्ररूपी अनुपात 3 लंबे : 1 बौना; जीनरूपी अनुपात 1 TT : 2 Tt : 1 tt।
- लघु उत्तरीय
Q8. मेंडल के प्रभाविता के नियम को एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
प्रभाविता का नियम कहता है कि जब दो विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध पौधों के बीच संकरण कराया जाता है, तो प्रथम पीढ़ी (F1) में केवल एक लक्षण प्रकट होता है, जिसे प्रभावी लक्षण कहते हैं, और दूसरा छिप जाता है जिसे अप्रभावी कहते हैं। उदाहरण: शुद्ध लंबे (TT) और बौने (tt) मटर के पौधों के संकरण से F1 पीढ़ी के सभी पौधे लंबे (Tt) प्राप्त हुए, जिससे पता चला कि लंबापन प्रभावी लक्षण है और बौनापन अप्रभावी।
- लघु उत्तरीय
Q9. एकल संकर क्रॉस में फीनोटाइपिक अनुपात 3:1 कैसे प्राप्त होता है? एक उदाहरण लेकर चेकर बोर्ड की सहायता से समझाइए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
एकल संकर क्रॉस में एक जीन के दो युग्मविकल्पी होते हैं। उदाहरण: मटर के पौधे का लंबापन (T) और बौनापन (t)। जब शुद्ध लंबे (TT) और बौने (tt) पौधों का संकरण किया जाता है, तो F1 पीढ़ी विषमयुग्मजी (Tt) लंबे पौधे देती है। F1 पौधों का स्वपरागण कराने पर, नर युग्मक T या t और मादा युग्मक T या t बनते हैं। चेकर बोर्ड में इनके यादृच्छिक संयोजन से जीनोटाइप TT, Tt, tT, tt 1:2:1 अनुपात में और फीनोटाइप 3 लंबे : 1 बौना प्राप्त होता है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q10. एक द्विसंकर संकरण का उपयोग करते हुए, यह सिद्ध कीजिए कि विभिन्न जीनों के युग्मविकल्पी स्वतंत्र रूप से वितरित होते हैं।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) सिद्ध करने के लिए द्विसंकर संकरण का उपयोग किया जाता है। मटर के पौधे में दो लक्षण - बीज का आकार (गोल R प्रभावी, झुर्रीदार r अप्रभावी) और बीज का रंग (पीला Y प्रभावी, हरा y अप्रभावी) लेते हैं। शुद्ध गोल पीले (RRYY) और झुर्रीदार हरे (rryy) पौधों के संकरण से F1 पीढ़ी में सभी पौधे विषमयुग्मजी गोल पीले (RrYy) प्राप्त होते हैं। F1 पौधों में युग्मक निर्माण के समय, R और r का Y और y से स्वतंत्र रूप से वितरण होता है, जिससे चार प्रकार के युग्मक RY, Ry, rY, ry समान अनुपात में बनते हैं। इन युग्मकों का यादृच्छिक संयोजन F2 पीढ़ी में 16 संततियों का निर्माण करता है, जिनके लक्षणप्रारूप 9 गोल पीले : 3 गोल हरे : 3 झुर्रीदार पीले : 1 झुर्रीदार हरे के अनुपात में होते हैं। यह अनुपात तभी संभव है जब दोनों लक्षण एक-दूसरे से स्वतंत्र हों और युग्मविकल्पी अलग-अलग लक्षणों के लिए स्वतंत्र रूप से वितरित हों। अतः यह संकरण स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का प्रमाण है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q11. मटर के पौधों में मेंडल के द्विसंकर संकरण प्रयोग को रेखाचित्र सहित समझाइए।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
मेंडल ने दो विपर्यासी लक्षणों (जैसे बीज का रंग और आकार) के लिए द्विसंकर संकरण (dihybrid cross) किया। उन्होंने शुद्ध गोल पीले बीज (RRYY) और झुर्रीदार हरे बीज (rryy) वाले पौधों के बीच संकरण कराया। F1 पीढ़ी में सभी पौधे गोल पीले बीज (RrYy) वाले थे, जो प्रभावी लक्षण प्रदर्शित करते हैं। F1 पौधों के स्वपरागण से F2 पीढ़ी में चार प्रकार के लक्षणप्रारूप (phenotypes) 9:3:3:1 के अनुपात में प्राप्त हुए - 9 गोल पीले, 3 गोल हरे, 3 झुर्रीदार पीले, और 1 झुर्रीदार हरा। इससे सिद्ध हुआ कि विभिन्न लक्षणों के जीन स्वतंत्र रूप से वितरित होते हैं। (रेखाचित्र में जनक, युग्मक, F1, F2 पीढ़ी और पनेट वर्ग दर्शाया जाना चाहिए।)
- केस स्टडी
Q12. एक वैज्ञानिक ने मटर के पौधों में लंबाई के गुण का अध्ययन किया। उसने शुद्ध नस्ल के लंबे (TT) और बौने (tt) पौधों के बीच क्रॉस करवाया। F₁ पीढ़ी के सभी पौधे लंबे पाए गए। इसके बाद F₁ पौधों का स्व-परागण (सेल्फिंग) करवाने पर F₂ पीढ़ी में कुछ पौधे बौने भी उत्पन्न हुए।
4 अंक- (i) (क) F₁ पीढ़ी के पौधों के जीनोटाइप और फीनोटाइप बताइए।2 अंक
- (ii) (ख) F₂ पीढ़ी में जीनोटाइपिक एवं फीनोटाइपिक अनुपात ज्ञात कीजिए।2 अंक
▸ उत्तर▾ उत्तर
F₁: Tt लंबा; F₂ जीनोटाइपिक 1:2:1 (TT:Tt:tt), फीनोटाइपिक 3:1 (लंबा:बौना)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
CBSE परीक्षा में कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 'आनुवंशिकता' से किस प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं?
इस अध्याय से मुख्यतः ज्ञान और समझ पर आधारित प्रश्न आते हैं। इनमें मेंडल के नियमों की परिभाषा एवं व्याख्या, एकल व द्विसंकर संकरण प्रयोगों का चित्र सहित वर्णन, प्रभावी-अप्रभावी लक्षणों की पहचान, जीनरूपी एवं प्ररूपी अनुपात की गणना, तथा लिंग निर्धारण की प्रक्रिया शामिल होती है। इसके अतिरिक्त, बहुविकल्पीय प्रश्नों में आनुवंशिकी की आधारभूत शब्दावली और मेंडल के प्रयोगों पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर के पौधे को ही क्यों चुना?
मेंडल ने मटर (Pisum sativum) को इसके कई लाभकारी गुणों के कारण चुना: इसमें स्पष्ट विपरीत लक्षण (जैसे लंबा/बौना, हरा/पीला बीज) पाए जाते हैं, इसका जीवन चक्र छोटा होता है जिससे शीघ्र परिणाम मिलते हैं, स्वपरागण व पर-परागण दोनों संभव है, तथा एक बार में अनेक संतति उत्पन्न होती है। इसके अतिरिक्त, इसे उगाना और प्रबंधित करना सरल था।
मानव में लिंग निर्धारण की प्रक्रिया को संक्षेप में समझाइए।
मानव में लिंग निर्धारण XY गुणसूत्र प्रणाली द्वारा होता है। महिलाओं में दो X गुणसूत्र (XX) तथा पुरुषों में एक X और एक Y गुणसूत्र (XY) होते हैं। संतान का लिंग पिता द्वारा दिए जाने वाले शुक्राणु पर निर्भर करता है; यदि X-युक्त शुक्राणु अंडाणु को निषेचित करता है तो संतति मादा (XX) होगी, और यदि Y-युक्त शुक्राणु निषेचन करता है तो नर (XY) होगी। इस प्रकार प्रत्येक गर्भधारण में लड़का या लड़की होने की संभावना सैद्धांतिक रूप से 50% होती है।
एकल संकर क्रॉस के F2 पीढ़ी में मेंडल ने क्या प्ररूपी और जीनरूपी अनुपात देखा?
शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) मटर के पौधों के बीच एकल संकर क्रॉस के F2 पीढ़ी में मेंडल ने प्ररूपी अनुपात 3 लंबे : 1 बौना देखा, जबकि जीनरूपी अनुपात 1 TT : 2 Tt : 1 tt पाया। यह प्रभावी लक्षण (लंबा) और अप्रभावी लक्षण (बौना) के पृथक्करण के नियम की पुष्टि करता है।
अन्य अध्याय
- अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
- अध्याय 2: अम्ल, क्षारक और लवण
- अध्याय 3: धातु और अधातु
- अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक
- अध्याय 5: जैव प्रक्रम
- अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय
- अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?
- अध्याय 8: आनुवंशिकता
- अध्याय 9: प्रकाश - परावर्तन एवं अपवर्तन
- अध्याय 10: मानव नेत्र और रंगीन संसार
- अध्याय 11: विद्युत
- अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
- अध्याय 13: हमारा पर्यावरण