कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 10: मानव नेत्र और रंगीन संसार — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर
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qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026
संक्षेप में उत्तर
हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 10 (“मानव नेत्र और रंगीन संसार”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।
कक्षा 10 विज्ञान का अध्याय 10, 'मानव नेत्र और रंगीन संसार', प्रकाशिकी के दो रोमांचक पहलुओं को जोड़ता है – मानव नेत्र की कार्यप्रणाली और प्रकाश से जुड़ी कुछ अद्भुत प्राकृतिक घटनाएँ। इस अध्याय में, आप नेत्र की संरचना, जैसे कॉर्निया, आइरिस, पुतली, लेंस और रेटिना, तथा उनकी भूमिकाओं को समझेंगे। नेत्र लेंस की अपनी फोकस दूरी बदलने की क्षमता, जिसे 'समंजन क्षमता' कहते हैं, वस्तुओं को अलग दूरियों पर स्पष्ट देखने में कैसे सहायक होती है, यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। फिर, दृष्टि-दोषों – निकट-दृष्टि (मायोपिया), दूर-दृष्टि (हाइपरमेट्रोपिया) और जरा-दूरदृष्टि (प्रेसबायोपिया) – के कारण, लक्षण और उपयुक्त लेंसों (अवतल या उत्तल) से उनके निवारण की विधि का विस्तृत अध्ययन है। यह खंड आपको लेंस की क्षमता की गणना करने और किरण आरेख बनाने के लिए तैयार करता है।
अध्याय का दूसरा भाग प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण और प्रकीर्णन पर केंद्रित है। आप जानेंगे कि प्रिज्म श्वेत प्रकाश को सात रंगों में कैसे विभक्त करता है और अपवर्तनांक की रंग पर निर्भरता इसका कारण है। वायुमंडलीय अपवर्तन क्यों तारों को टिमटिमाता और सूर्य को वास्तविक समय से पहले उदित/बाद में अस्त दिखाता है। प्रकाश का प्रकीर्णन – टिंडल प्रभाव, आकाश का नीला रंग और सूर्योदय/सूर्यास्त की लालिमा – ये सब रोज़मर्रा के प्रश्नों के पीछे का विज्ञान स्पष्ट करते हैं। CBSE परीक्षा में अक्सर परिभाषाएँ, किरण आरेख, संख्यात्मक प्रश्न (जैसे, चश्मे के लेंस की क्षमता ज्ञात करना) और कारण-आधारित व्याख्याएँ पूछी जाती हैं। qpaper.in पर इस अध्याय के लिए तैयार किया गया प्रश्न-बैंक इन्हीं प्रतिरूपों पर आधारित है, जिससे विद्यार्थी हर प्रकार के प्रश्न का अभ्यास कर सशक्त होते हैं।
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विज्ञान — मानव नेत्र और रंगीन संसार
खंड क
- 1.1
तारों का टिमटिमाना किस भौतिक परिघटना के कारण होता है?
(a) वायुमंडलीय प्रकीर्णन(b) वायुमंडलीय अपवर्तन(c) प्रकाश का परावर्तन(d) प्रकाश का व्यतिकरण - 2.1
एक सामान्य नेत्र के दृष्टिपटल (रेटिना) से नेत्र लेंस की दूरी लगभग 2.5 cm होती है। जब नेत्र दूर स्थित वस्तु से निकट की वस्तु (25 cm पर) पर फोकस करता है, तो नेत्र लेंस की क्षमता में कितनी वृद्धि होती है?
(a) 2 D(b) 4 D(c) 8 D(d) 16 D - 3.1
एक व्यक्ति दूरदर्शिता (हाइपरमेट्रोपिया) से पीड़ित है और उसे +2 D क्षमता का लेंस निर्धारित किया गया है। इस लेंस की फोकस दूरी क्या होगी?
(a) +50 cm(b) -50 cm(c) +25 cm(d) -25 cm
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CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:
| प्रश्न प्रकार | प्रति अंक | हमारे बैंक में |
|---|---|---|
| बहुविकल्पीय (MCQ) | 1 अंक | 13 |
| अभिकथन–कारण | 1 अंक | 6 |
| लघु उत्तरीय | 2 अंक | 8 |
| लघु उत्तरीय | 3 अंक | 6 |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 अंक | 5 |
| केस स्टडी | 4 अंक | 6 |
इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।
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- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q1. तारों का टिमटिमाना किस भौतिक परिघटना के कारण होता है?
1 अंक(A) वायुमंडलीय प्रकीर्णन(B) वायुमंडलीय अपवर्तन(C) प्रकाश का परावर्तन(D) प्रकाश का व्यतिकरण▸ उत्तर▾ उत्तर
वायुमंडलीय अपवर्तन
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q2. एक सामान्य नेत्र के दृष्टिपटल (रेटिना) से नेत्र लेंस की दूरी लगभग 2.5 cm होती है। जब नेत्र दूर स्थित वस्तु से निकट की वस्तु (25 cm पर) पर फोकस करता है, तो नेत्र लेंस की क्षमता में कितनी वृद्धि होती है?
1 अंक(A) 2 D(B) 4 D(C) 8 D(D) 16 D▸ उत्तर▾ उत्तर
4 D
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q3. एक व्यक्ति दूरदर्शिता (हाइपरमेट्रोपिया) से पीड़ित है और उसे +2 D क्षमता का लेंस निर्धारित किया गया है। इस लेंस की फोकस दूरी क्या होगी?
1 अंक(A) +50 cm(B) -50 cm(C) +25 cm(D) -25 cm▸ उत्तर▾ उत्तर
+50 cm
- बहुविकल्पीय (MCQ)
Q4. एक निकट दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु 80 cm पर है। इस दोष के निवारण हेतु चश्मे में प्रयुक्त लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
1 अंक(A) -1.25 D(B) +1.25 D(C) -0.8 D(D) +0.8 D▸ उत्तर▾ उत्तर
-1.25 D
- अभिकथन–कारण
Q5. अभिकथन (A): तारे टिमटिमाते हैं जबकि ग्रह नहीं टिमटिमाते। कारण (R): ग्रह पृथ्वी के अपेक्षाकृत अधिक पास होते हैं और उन्हें विस्तारित स्रोत माना जाता है।
1 अंक(A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।▸ उत्तर▾ उत्तर
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।
- लघु उत्तरीय
Q6. एक व्यक्ति 50 सेमी से अधिक दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख सकता है। उसके दृष्टि दोष का नाम बताइए तथा सुधार के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति और फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
यह दृष्टि दोष 'निकट-दृष्टि दोष' (मायोपिया) है क्योंकि व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता। सुधार के लिए अवतल लेंस की आवश्यकता है। फोकस दूरी की गणना: व्यक्ति का दूर बिंदु 50 सेमी है, अतः अनंत से आने वाली किरणों को अवतल लेंस से 50 सेमी पर प्रतिबिम्ब बनाने के लिए लेंस की फोकस दूरी f = -50 सेमी (चिह्न परिपाटी के अनुसार) अर्थात 0.5 मीटर। लेंस की क्षमता = 1/f(मीटर में) = -2 डाइऑप्टर।
- लघु उत्तरीय
Q7. तारों का टिमटिमाना क्यों होता है?
2 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
तारों का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल में अपवर्तन के कारण टिमटिमाता प्रतीत होता है। वायुमंडल की विभिन्न परतों का तापमान एवं घनत्व निरंतर बदलता रहता है, जिससे अपवर्तनांक भी बदलता है। फलस्वरूप तारे से आने वाली प्रकाश किरणें लगातार अपना पथ बदलती रहती हैं, जिससे आभासी स्थिति बदलती रहती है तथा तारे की चमक भी घटती-बढ़ती रहती है। इसे ही टिमटिमाना कहते हैं।
- लघु उत्तरीय
Q8. एक व्यक्ति को दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं लेकिन पास की वस्तुएँ धुंधली दिखती हैं। नाम बताइए, कारण लिखिए और निवारण समझाइए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
यह दीर्घ-दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) है। कारण: नेत्र लेंस की फोकस दूरी अधिक हो जाना या नेत्र गोलक का छोटा हो जाना, जिससे पास की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। निवारण: उपयुक्त फोकस दूरी के उत्तल लेंस के प्रयोग से, जो प्रकाश किरणों को पहले अभिसरित करता है ताकि प्रतिबिंब रेटिना पर बने।
- लघु उत्तरीय
Q9. प्रकाश का प्रकीर्णन क्या है? आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है? समझाइए।
3 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
प्रकाश का प्रकीर्णन वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश की किरणें वायुमंडल में उपस्थित छोटे-छोटे कणों से टकराकर सभी दिशाओं में फैल जाती हैं। रैले के प्रकीर्णन नियम के अनुसार, प्रकीर्णन की तीव्रता तरंगदैर्ध्य की चौथी घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है। नीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य लाल प्रकाश की तुलना में कम होती है, अतः नीला प्रकाश अधिक प्रकीर्णित होता है। इस कारण आकाश हमें नीला दिखाई देता है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q10. प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के विक्षेपण की घटना को सचित्र समझाइए। इस प्रक्रिया में प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक विभिन्न रंगों के लिए किस प्रकार भिन्न होता है और इसके कारण ही रंगों का पृथक्करण क्यों होता है?
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का विक्षेपण: जब श्वेत प्रकाश की किरण किसी प्रिज्म से गुजरती है, तो वह अपने घटक रंगों में विभाजित हो जाती है। पर्दे पर प्राप्त रंगीन पट्टी को वर्णक्रम (स्पेक्ट्रम) कहते हैं, जिसमें बैंगनी से लाल तक सात रंग क्रम में प्राप्त होते हैं। यह घटना प्रकाश के विक्षेपण कहलाती है। कारण: श्वेत प्रकाश विभिन्न रंगों का मिश्रण है। जब यह प्रिज्म में प्रवेश करता है, तो प्रत्येक रंग का अपवर्तनांक प्रिज्म के पदार्थ में भिन्न होता है। बैंगनी रंग के लिए अपवर्तनांक सबसे अधिक तथा लाल रंग के लिए सबसे कम होता है। इसलिए बैंगनी का विचलन सबसे अधिक और लाल का सबसे कम होता है। परिणामस्वरूप सभी रंग अलग-अलग दिशाओं में मुड़ते हैं और पृथक दिखाई देते हैं। आरेख में एक प्रिज्म तथा उस पर आपतित श्वेत प्रकाश, अपवर्तन के बाद निर्गत रंगों की पट्टी दर्शाई जाती है।
- दीर्घ उत्तरीय
Q11. प्रकाश के प्रकीर्णन की परिघटना क्या होती है? दैनिक जीवन में इस पर आधारित आकाश का नीला दिखना, सूर्योदय-सूर्यास्त के समय सूर्य का लाल प्रतीत होना, और खतरे के संकेतों का लाल रंग में होना जैसी घटनाओं की व्याख्या कीजिए।
5 अंक▸ उत्तर▾ उत्तर
प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light): जब प्रकाश किसी माध्यम से गुजरता है, तो उसके मार्ग में उपस्थित अतिसूक्ष्म कणों (जैसे धूल, धुआँ, वायु के अणु) द्वारा प्रकाश सभी दिशाओं में परावर्तित होता है। इसे प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। प्रकीर्णित प्रकाश की तीव्रता तरंगदैर्ध्य की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है (रेले का नियम)। अर्थात् छोटी तरंगदैर्ध्य का प्रकाश अधिक प्रकीर्णित होता है। घटनाओं की व्याख्या: 1. आकाश का नीला रंग: वायुमंडल में उपस्थित सूक्ष्म कण नीले रंग (छोटी तरंगदैर्ध्य) को अधिक प्रकीर्णित करते हैं। जब हम आकाश की ओर देखते हैं, तो यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है, इसलिए आकाश नीला दिखता है। 2. सूर्योदय-सूर्यास्त पर लाल सूर्य: जब सूर्य क्षितिज के निकट होता है, तब प्रकाश को वायुमंडल में अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। नीला प्रकाश अधिकांशतः प्रकीर्णित हो जाता है, केवल लाल प्रकाश (बड़ी तरंगदैर्ध्य) ही हमारी आँखों तक पहुँचता है, इसलिए सूर्य लाल दिखता है। 3. खतरे के सिग्नल का लाल रंग: लाल रंग की तरंगदैर्ध्य सबसे अधिक होने के कारण इसका प्रकीर्णन सबसे कम होता है, अतः यह कोहरे या धुएँ में भी दूर से दिखाई दे जाता है। इसलिए खतरे के संकेत लाल रंग के बनाए जाते हैं।
- केस स्टडी
Q12. श्रीमान शर्मा, जो 60 वर्ष के हैं, को पास और दूर दोनों की वस्तुएँ स्पष्ट देखने में कठिनाई होती है। डॉक्टर ने बताया कि उनकी आँखों की समंजन क्षमता कम हो गई है। उनके दूर बिंदु की दूरी 1.5 मीटर और निकट बिंदु की दूरी 1 मीटर पाई गई।
4 अंक- (i) श्रीमान शर्मा किस दृष्टि दोष से पीड़ित हैं?1 अंक
- (ii) इस दोष का कारण और सामान्य सुधार बताइए।1 अंक
- (iii) उनके दूर दृष्टि दोष को ठीक करने के लिए आवश्यक लेंस की शक्ति ज्ञात कीजिए।2 अंक
▸ उत्तर▾ उत्तर
श्रीमान शर्मा प्रेसबायोपिया से पीड़ित हैं। समंजन क्षमता घटने के कारण निकट बिंदु दूर होता है और साथ में दूर की दृष्टि भी कमजोर है। बाइफोकल लेंस से सुधार किया जाता है। दूर दृष्टि के लिए आवश्यक लेंस शक्ति -0.67 डायोप्टर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निकट-दृष्टि दोष (मायोपिया) क्या है और इसे किस प्रकार ठीक किया जाता है?
निकट-दृष्टि में व्यक्ति पास की वस्तुएँ तो स्पष्ट देख सकता है परंतु दूर की वस्तुएँ धुंधली दिखाई देती हैं। यह तब होता है जब नेत्र लेंस की फोकस दूरी बहुत कम हो जाती है या नेत्र गोलक लंबा हो जाता है, जिससे प्रतिबिम्ब रेटिना से पहले बनता है। इसके निवारण के लिए उचित क्षमता के अवतल लेंस का प्रयोग किया जाता है, जो आने वाली प्रकाश किरणों को थोड़ा अपसारित कर देता है और प्रतिबिम्ब को रेटिना पर लाता है।
आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है?
यह प्रकाश के प्रकीर्णन का परिणाम है। वायुमंडल में सूक्ष्म कण सूर्य के प्रकाश को चारों ओर बिखेरते हैं। रैले के प्रकीर्णन नियम के अनुसार, प्रकीर्णन की तीव्रता तरंगदैर्ध्य की चतुर्थ घात के व्युत्क्रमानुपाती होती है। इसलिए नीला प्रकाश, जिसकी तरंगदैर्ध्य लाल प्रकाश से कम है, अधिक प्रकीर्णित होता है। हमारी आँखों तक यह प्रकीर्णित नीला प्रकाश ही सब दिशाओं से पहुँचता है, जिससे आकाश नीला दिखता है।
एक निकट-दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिंदु 80 cm है। इस दोष के निवारण हेतु चश्मे में प्रयुक्त लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
दूर बिंदु 80 cm है, अर्थात व्यक्ति 80 cm से अधिक दूर की वस्तु स्पष्ट नहीं देख सकता। चश्मे द्वारा, अनंत पर स्थित वस्तु का आभासी प्रतिबिम्ब 80 cm पर बनना चाहिए। लेंस सूत्र 1/f = 1/v - 1/u से, u = -∞, v = -80 cm (क्योंकि प्रतिबिम्ब आभासी और लेंस के सामने है), इसलिए 1/f = 1/(-80) - 1/(-∞) = -1/80 cm⁻¹. फोकस दूरी f = -80 cm = -0.8 m. लेंस की क्षमता P = 1/f (मीटर में) = 1/(-0.8) = -1.25 D. अतः -1.25 D का अवतल लेंस प्रयुक्त होगा।
प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण का कारण क्या है?
जब श्वेत प्रकाश प्रिज्म से गुज़रता है, तो वह अपवर्तन के कारण अपने अवयवी रंगों में विभक्त हो जाता है। इसका कारण यह है कि प्रिज्म के पदार्थ (जैसे काँच) का अपवर्तनांक प्रकाश के विभिन्न रंगों के लिए भिन्न-भिन्न होता है। बैंगनी रंग के लिए अपवर्तनांक सबसे अधिक और लाल के लिए सबसे कम होता है। फलस्वरूप, बैंगनी रंग सबसे अधिक मुड़ता है और लाल सबसे कम। इस प्रकार रंग एक पर्दे पर अलग-अलग स्थानों पर दिखते हैं, जिसे वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।
अन्य अध्याय
- अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
- अध्याय 2: अम्ल, क्षारक और लवण
- अध्याय 3: धातु और अधातु
- अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक
- अध्याय 5: जैव प्रक्रम
- अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय
- अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?
- अध्याय 8: आनुवंशिकता
- अध्याय 9: प्रकाश - परावर्तन एवं अपवर्तन
- अध्याय 10: मानव नेत्र और रंगीन संसार
- अध्याय 11: विद्युत
- अध्याय 12: विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव
- अध्याय 13: हमारा पर्यावरण