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कक्षा 9 गणित अध्याय 3: संख्याओं की दुनिया — महत्वपूर्ण प्रश्न व नमूना पेपर

CBSE· Ganita Manjari· 44+ मौलिक प्रश्न तैयारView in English

उत्तर सहित महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्नों का अभ्यास करें, CBSE अंक-विभाजन व ब्लूप्रिंट देखें, या पूरा नमूना प्रश्नपत्र बनाएँ — मुफ़्त, 2026-27 के लिए।

qpaper की CBSE पाठ्यक्रम टीम द्वारा समीक्षित · संपादन: Mohit · अपडेट: जून 2026

संक्षेप में उत्तर

हाँ — इस पृष्ठ पर कक्षा 9 गणित अध्याय 3 (“संख्याओं की दुनिया”) के 44+ मौलिक महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर सहित हैं (बहुविकल्पीय (MCQ), अभिकथन–कारण, लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय, केस स्टडी)। इन्हें मुफ़्त हल करें, या पूरा CBSE बोर्ड-पैटर्न नमूना प्रश्नपत्र (80 अंक) बनाकर PDF या Word में निर्यात करें — हिंदी व अंग्रेज़ी में, 2026-27 के लिए।

कक्षा 9 गणित की पाठ्यपुस्तक 'गणित मंजरी' का अध्याय 3, 'संख्याओं की दुनिया', विद्यार्थियों को संख्याओं के विशाल और रोचक संसार से परिचित कराता है। यह अध्याय प्राकृतिक संख्याओं (1, 2, 3, ...) से शुरू होकर पूर्ण संख्याओं, पूर्णांकों और अंततः परिमेय संख्याओं तक की यात्रा है। इसमें ब्रह्मगुप्त जैसे प्राचीन भारतीय गणितज्ञों के ऐतिहासिक योगदान, जैसे ऋण (ऋणात्मक) और धन (धनात्मक) संख्याओं के नियम, का वर्णन किया गया है। पूर्णांकों पर जोड़, घटाव, गुणा और भाग की संक्रियाओं को ब्रह्मगुप्त के दृष्टिकोण से समझाया गया है। उदाहरण के लिए, (-5) × (-6) = 30 जैसे गुणन के नियमों को 'ऋण का ऋण से गुणा धन होता है' के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस अध्याय में परिमेय संख्याओं की तुल्यता जाँचने के तरीके भी सिखाए गए हैं, जैसे कि -5/7 और 10/(-14) समतुल्य हैं या नहीं, इसे भिन्न को सरल करके परखा जाता है। साथ ही, प्राचीन काल में चरवाहों द्वारा पत्थरों या निशानों से पशुओं की गिनती जैसी रोचक विधियों का उल्लेख किया गया है। छात्र यह भी सीखते हैं कि प्राकृतिक संख्याएँ व्यवकलन के अंतर्गत संवृत नहीं हैं, जबकि पूर्णांक संवृत होते हैं।

CBSE परीक्षा की दृष्टि से यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें से वास्तविक जीवन की परिस्थितियों (जैसे ऋण और लाभ वाले प्रश्न), ऐतिहासिक तथ्यों, संख्याओं के गुणधर्मों और समतुल्यता पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। qpaper.in पर आप इस अध्याय के लिए विविध प्रकार के प्रश्न-पत्र आसानी से तैयार कर सकते हैं।

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गणितसंख्याओं की दुनिया

कक्षा 9समय: 3 घंटेअधिकतम अंक: 80

खंड क

  1. 1.

    इशांगो अस्थि पर अंकित संख्याएँ 11, 13, 17, 19 के क्रम में हैं। इसी पैटर्न के अनुसार, अगली तीन संख्याएँ क्रमशः कौन-सी होंगी?

    (a) 21, 23, 29(b) 23, 29, 31(c) 23, 27, 31(d) 21, 25, 29
    1
  2. 2.

    एक प्राचीन व्यापारी के पास 12 बोरी मसाले थे। उसने 5 बोरी 2 किलोग्राम चाँदी प्रति बोरी की दर से बेचीं और 3 बोरी 1.5 किलोग्राम चाँदी प्रति बोरी की दर से खरीदीं। यदि प्रारंभ में उस पर 10 किलोग्राम चाँदी का ऋण था, तो अब उसकी स्थिति क्या है? (बेचना = धन, खरीदना = ऋण)

    (a) 4 1/2 किग्रा धन(b) 4 1/2 किग्रा ऋण(c) 5 1/2 किग्रा ऋण(d) 5 1/2 किग्रा धन
    1
  3. 3.

    1, 2, 3, 4, ... इस प्रकार की संख्याओं को क्या कहते हैं?

    (a) पूर्णांक(b) परिमेय संख्याएँ(c) प्राकृतिक संख्याएँ(d) पूर्ण संख्याएँ
    1

पूरे पेपर में 41 और प्रश्न

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अंक-विभाजन व ब्लूप्रिंट

CBSE परीक्षा में यह अध्याय आमतौर पर निम्न प्रकार के प्रश्न देता है। अंतिम कॉलम बताता है कि इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में हर प्रकार के कितने मौलिक प्रश्न तैयार हैं:

प्रश्न प्रकारप्रति अंकहमारे बैंक में
बहुविकल्पीय (MCQ)1 अंक13
अभिकथन–कारण1 अंक6
लघु उत्तरीय2 अंक8
लघु उत्तरीय3 अंक6
दीर्घ उत्तरीय5 अंक5
केस स्टडी4 अंक6

इस अध्याय के लिए हमारे बैंक में 44 मौलिक, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित।

महत्वपूर्ण व नमूना प्रश्न (उत्तर सहित)

अभ्यास व पुनरावृत्ति के लिए असली, परीक्षा-स्तरीय प्रश्न — हर प्रश्न उत्तर सहित। असीमित प्रश्नों के लिए पूरा प्रश्नपत्र बनाएँ।

  1. Q1. इशांगो अस्थि पर अंकित संख्याएँ 11, 13, 17, 19 के क्रम में हैं। इसी पैटर्न के अनुसार, अगली तीन संख्याएँ क्रमशः कौन-सी होंगी?

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) 21, 23, 29(B) 23, 29, 31(C) 23, 27, 31(D) 21, 25, 29
    उत्तर

    23, 29, 31

  2. Q2. एक प्राचीन व्यापारी के पास 12 बोरी मसाले थे। उसने 5 बोरी 2 किलोग्राम चाँदी प्रति बोरी की दर से बेचीं और 3 बोरी 1.5 किलोग्राम चाँदी प्रति बोरी की दर से खरीदीं। यदि प्रारंभ में उस पर 10 किलोग्राम चाँदी का ऋण था, तो अब उसकी स्थिति क्या है? (बेचना = धन, खरीदना = ऋण)

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) 4 1/2 किग्रा धन(B) 4 1/2 किग्रा ऋण(C) 5 1/2 किग्रा ऋण(D) 5 1/2 किग्रा धन
    उत्तर

    4 1/2 किग्रा ऋण

  3. Q3. 1, 2, 3, 4, ... इस प्रकार की संख्याओं को क्या कहते हैं?

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) पूर्णांक(B) परिमेय संख्याएँ(C) प्राकृतिक संख्याएँ(D) पूर्ण संख्याएँ
    उत्तर

    प्राकृतिक संख्याएँ

  4. Q4. ब्रह्मगुप्त के अनुसार, किसी संख्या में से उसी संख्या को घटाने पर क्या प्राप्त होता है?

    1 अंक
    बहुविकल्पीय (MCQ)
    (A) वही संख्या(B) शून्य(C) एक(D) ऋणात्मक संख्या
    उत्तर

    शून्य

  5. Q5. अभिकथन (A): सभी पूर्णांक परिमेय संख्याएँ हैं, किन्तु सभी परिमेय संख्याएँ पूर्णांक नहीं हैं। कारण (R): 1/2 एक परिमेय संख्या है जो पूर्णांक नहीं है।

    1 अंक
    अभिकथन–कारण
    (A) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।(B) अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।(C) अभिकथन (A) सही है परन्तु कारण (R) गलत है।(D) अभिकथन (A) गलत है परन्तु कारण (R) सही है।
    उत्तर

    अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं परन्तु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।

  6. Q6. सिद्ध कीजिए कि किन्हीं दो धनात्मक पूर्णांकों a और b के लिए, (-a) × (-b) = a × b होता है।

    2 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    (-a) × (-b) = (-1 × a) × (-1 × b) = (-1) × (-1) × a × b = 1 × a × b = a × b

  7. Q7. एक व्यापारी पर ₹450 का ऋण है। वह ₹230 का और ऋण लेता है। उसकी कुल ऋण स्थिति पूर्णांक के रूप में लिखिए।

    2 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    -680

  8. Q8. एक किसान ने ₹1200 का ऋण लिया। उसने पहले दिन ₹450 का लाभ कमाया और अगले दिन ₹600 का और ऋण लिया। पूर्णांकों का उपयोग करते हुए उसकी अंतिम आर्थिक स्थिति ज्ञात कीजिए।

    3 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    किसान पर ₹1350 का ऋण है।

  9. Q9. क्या शून्य एक परिमेय संख्या है? कारण सहित समझाइए।

    3 अंक
    लघु उत्तरीय
    उत्तर

    हाँ, शून्य एक परिमेय संख्या है।

  10. Q10. पूर्णांकों का समुच्चय भाग की संक्रिया के अंतर्गत संवृत नहीं है। उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए और कारण बताइए कि भाग देने पर परिणाम सदैव पूर्णांक क्यों नहीं होता।

    5 अंक
    दीर्घ उत्तरीय
    उत्तर

    पूर्णांक भाग के अंतर्गत संवृत नहीं हैं। उदाहरण: 5 ÷ 2 = 2.5, जो पूर्णांक नहीं है। (–7) ÷ 3 = –7/3, जो पूर्णांक नहीं है। कारण: दो पूर्णांकों के भाग से सदैव पूर्णांक प्राप्त नहीं होता क्योंकि भाज्य, भाजक से पूर्णतः विभाज्य न होने पर परिणाम भिन्न हो जाता है, जो पूर्णांक नहीं है।

  11. Q11. एक व्यापारी पर 9500 रुपये का ऋण है। वह पहले 3200 रुपये का भुगतान करता है, फिर 1800 रुपये का और भुगतान करता है। तीसरे दिन वह 5000 रुपये उधार लेता है। उसकी अंतिम वित्तीय स्थिति पूर्णांकों का उपयोग करके ज्ञात कीजिए तथा अपने उत्तर की जाँच संख्या रेखा पर कीजिए।

    5 अंक
    दीर्घ उत्तरीय
    उत्तर

    प्रारंभिक ऋण = –9500। भुगतान ऋण को कम करता है, इसलिए: –9500 + 3200 = –6300; –6300 + 1800 = –4500। फिर उधार लेने पर ऋण बढ़ता है: –4500 + (–5000) = –9500। अंतिम स्थिति = –9500 रुपये (ऋण)। संख्या रेखा पर: –9500 से शुरू करें, दाईं ओर 3200 कदम चलें (–6300 पर), फिर 1800 कदम (–4500 पर), फिर बाईं ओर 5000 कदम चलें (–9500 पर पहुँचें)।

  12. Q12. एक किसान अपनी 1 बीघा भूमि को अपने दो पुत्रों में समान रूप से बाँटता है। बड़ा पुत्र अपने हिस्से का 1/5 भाग मंदिर को दान कर देता है, और छोटा पुत्र अपने हिस्से का 1/4 भाग बेच देता है। शेष बची भूमि को दोनों पुत्र मिलकर खेती करते हैं।

    4 अंक
    केस स्टडी
    1. (i) प्रत्येक पुत्र को मूल भूमि का कितना भाग प्राप्त हुआ?1 अंक
    2. (ii) दान और बिक्री के बाद, बड़े और छोटे पुत्र के पास कितनी-कितनी भूमि बची?2 अंक
    3. (iii) दोनों पुत्रों के पास अब मूल भूमि का कुल कितना भाग शेष है?1 अंक
    उत्तर

    (a) 1/2 (b) बड़ा: 2/5, छोटा: 3/8 (c) 31/40

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस अध्याय में ब्रह्मगुप्त के किन नियमों का अध्ययन किया जाता है?

ब्रह्मगुप्त ने ऋण (negative) और धन (positive) संख्याओं के लिए जोड़, घटाव, गुणा और भाग के नियम दिए थे। इनमें प्रमुख हैं: दो धनों का योग धन, दो ऋणों का योग ऋण; गुणा में ऋण × ऋण = धन, ऋण × धन = ऋण; आदि। ये नियम पूर्णांकों की संक्रियाओं को समझने में मदद करते हैं।

कैसे जाँचें कि दो परिमेय संख्याएँ समतुल्य हैं?

दो परिमेय संख्याएँ a/b और c/d समतुल्य (बराबर) होती हैं यदि a × d = b × c हो। दूसरा तरीका: दोनों को सरलतम रूप में लाकर देखें कि वे एक जैसी हैं या नहीं। उदाहरण: -5/7 और 10/(-14) समतुल्य हैं क्योंकि 10/(-14) को (-2) से भाग देने पर -5/7 प्राप्त होता है।

क्या पूर्णांक सभी चार मूल संक्रियाओं (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) के अंतर्गत संवृत हैं?

नहीं। पूर्णांक जोड़, घटाव और गुणा के अंतर्गत संवृत हैं, क्योंकि इनसे प्राप्त परिणाम हमेशा पूर्णांक ही होता है। परंतु भाग के लिए संवृत नहीं हैं; उदाहरण के लिए, 5 ÷ 3 कोई पूर्णांक नहीं है (यह एक परिमेय संख्या है)।

प्राचीन गिनती विधियों का इस अध्याय में क्या महत्व है?

इस अध्याय में प्राचीन गिनती विधियों, जैसे पशुओं की गिनती के लिए पत्थरों का उपयोग, का उल्लेख करके यह दिखाया गया है कि संख्याओं की अवधारणा मानव सभ्यता के साथ कैसे विकसित हुई। इससे विद्यार्थियों को संख्याओं के इतिहास और उपयोगिता का बोध होता है।

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